आतंकवाद से निपटने वाली एक वीडियो

बम विस्फोट और उसके बाद का रुदण.. गहरे घाव छोड़ जाता है। कोई जीवन जीने की सतत प्रक्रिया के तहत इस भूल जाता है तो कोई.. कैसे कोई भूल पाएगा..।

30-32 लोगों की लाईन लगी हुई है। वो ऐसी चीज लेने आए हैं, जिसे कोई लेना नहीं चाहेगा.. कोई नहीं। डेथ सर्टिफिकेट मिलता है यहां। भारी मन से, न चाहते हुए भी.. जिंदगी का कड़वा सच पीना पड़ता है।

कल मेरी एक दोस्त वीडियो को देखना चाहती थी। बचपन की याद के कारण लेकिन मुझे लगा कि इसकी आज ज्यादा जरूरत है। बहुत ज्यादा.. हम आपको इस विडियो को देखना और समझना होगा।

आओगे जब तुम.. अंगना फूल खिलेंगे..

बहुत ही खूबसूरत बोल हैं इसके और उतनी खूबसूरती से आवाज दिया है इसे उस्ताद राशिद खान साहब ने। मैंने फिल्म नहीं देखी है। फिल्म का विडियो कुछ समझ नहीं आ रहा लेकिन फिर गाने का स्टैंडर्ड इतना हाई है कि इस मैं पिछले एक घंटे में आठ बार सुन चुका हूं। Hats Off to Whole Team of This Song।

गाने को सुनिए और बोल गुनगुनाना चाहें तो वह भी हाजिर है।

आओगे जब तुम सजना
आओगे जब तुम सजना
अंगना फूल खिलेंगे

बरसेगा सावन,
बरसेगा सावन
झूम झूम के
दो दिल ऐसे मिलेंगे

आओगे जब तुम सजना
अंगना फूल खिलेंगे

नैना तेरे कजरारे
नैनों पे हम दिल हारे हैं

अंजाने ही तेरे नैनों ने
वादे किए किए सारे हैं
सांसों ही लहर   मद्धम चले
तो से कहे

बरसेगा सावन
बरसेगा सावन
झूम झूम के
दो दिल ऐसे मिलेंगे

आओगे जब तुम सजना
अंगना फूल खिलेंगे

चंदा को उठा रातों में
है जिंदगी तेरे हाथों में
पलको पे झिल मिल तारे हैं
आना भरी बरसातों में
सपनों का जहां
होगा खिला खिला

बरसेगा सावन,
बरसेगा सावन
झूम झूम के
दो दिल ऐसे मिलेंगे

फिल्म- जब वी मेट
संगीतकार- संदेश शांडिल्य
गीतकार- इरशाद कामिल
गायक- उस्ताद राशिद खान 

मेरा कुछ सामान तुम्हारे पास पड़ा है…

अभी मैं इस गाने को ४ बार सुन चुका हू. कभी ये भी समय था की ऐसे गाने सुनने वालो को मैं अजीब तरीके से देखा करता था. आज मुझे मेरा भतीजा मुझे उसी नजरो से देखता है. उसकी आंखो में मैं वही भाव देखता हू जो कभी मेरी आंखो में हुआ करता था. क्या समय था और क्या समय है!!! :) :) सच में बड़ी अजीब सी दुनिया है कभी जिससे आप नफरत कर रहे होते हैं कभी उसी से प्यार हो जाता है. ये गाना कुछ वैसा ही है. मेरे ब्लोगिन्ग में आने का भी यही एक कारन है की जो मैं आज लिख रहा हू वो साल भर बाद क्या होगा. उसे पढने में बड़ा मजा आता है. खैर इन सब बातो को छोड़िये इस गाने का मजा लीजिये. ११६ चाँद की राते और वो तुम्हारे कंधे पर काला तिल. गुलज़ार साहब भी…. :)

Simply Outstanding, बेहतरीन, लाजवाब

इसे कहते है Simply Outstanding . एआर रहमान और नुसरत फतह अली खान की आवाज. इसके बोल लाजवाब हैं अगर आप सुन सकते हैं तो जरुर सुनिये

यूट्यूब: वंदे मातरम और उसमे दिए गए कमेंट

[youtube=http://www.youtube.com/watch?v=s1UgUpKz3Lc]

रविवार का दिन, काम का दवाब कम होता है । यूट्यूब खोल विडो देखने लगाइस विडो को देख मेरा रोम रोम रोमांचित हो जाता हैसोचा आज इसे अपने ब्लोग पर भी दाल दूजरा इस विडो पर दिए गए 96 कमेंट पर भी नजर डालिये

‘चीनी कम’ में सुकून ज्यादा

हैदराबादी जाफरानी पुलाव से फिल्म शुरू होती है। और इस पुलाव ने अक्खड़ अमिताभ बच्चन को बदल दिया।

लंदन में भारतीय खाने का सबसे बड़ा रेस्तरां चलाने वाले अमिताभ स्वभाव से थोड़े अक्खड़ हैं जिसे समझदार तब्बू ने बदल दिया।

फिल्म में कुल पांच किरदार हैं। तब्बू, अमिताभ बच्चन, जोहरा सहगल, परेश रावल और स्वनी खारा। सबने अपने किरदार के साथ पूरी ईमानदारी बरती है लेकिन छोटी सी लड़की स्वानी की एंक्टिग बेहतरीन है।

इस छोटी सी लड़की को एडल्ट फिल्म देखने का शौक है क्योंकि वह इन फिल्मों को देखने के लिए निश्चित उम्र तक वह जीवित नहीं रहेगी। उसे ब्लड कैंसर है। उसका नाम है सेक्सी।

[youtube=http://www.youtube.com/watch?v=SutIr9dofoA]

जोहरा सहगल और अमिताभ बच्चन मां-बेटे की भूमिका में हैं। बड़ी अच्छी जोड़ी है, मां-बेटे की। ईलाया राजा का संगीत मधुर है। फिल्म के दोनों गाने श्रेया घोषल ने गाया है। टाइटल ट्रैक चीनी कम बार-बार सुना जा सकता है।

हंसी से भरी यह फिल्म दर्शकों को अच्छी लगेगी। कूल और माईल्ड फिल्म।

भारतीय टीवी की कुछ पुरानी यादे

गुलज़ार का लिखा हुआजंगल जंगल बात चली है, पता चला है…. 

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फिर चाहे वोमिले सुर मेरा तुम्हारा ….

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बी आर चोपडा की महाभारत

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और अंत में आल टाइम् हिट जसपाल भट्टी

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 इनको देख बड़ा अच्छा लगता है.

एक चिडिया… Anek Cheediya

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I love this jingle. i have seen this on Neelima ji’s blog. Thanks again Neelima ji for showing this nice jingle. :)

Life in a METRO, दौड़ते-भागते शहर की कहानी

फ्लैट की चाबी मांगना, मेट्रीमोनियल वेबसाइट पर लड़कियां देखना, प्रोमोशन के लिए बॉस के आगे-पीछे घूमना, ट्रेन-बस में किसी अंजाने से मुलाकात और फिर दोस्ती हो जाना। यह सब कुछ हर रोज आजकल भारत के कोस्मोपोलिटन शहरों में हो रहा है। यह हमारे बदलते समाज की कहानी है। अंग्रेजी में इसे ट्रांजिशन फेज कहते हैं।

मुझे मुंबई के बारे में बहुत आइडिया नहीं है लेकिन जो लोग दिल्ली के नार्थ कैंपस इलाके की जीवन शैली को जानते हैं उन्हें कम से कम अनुमान होगा कि ऐसा सचमुच में होता है। रात को देर रात तक पार्क में घूमना। देर रात तक किसी दूसरे के कमरे का उपयोग करना।

अनुराग बसु का निर्देशन और प्रीतम का संगीत बेहतरीन है। सभी किरदारों ने अपने किरदार के साथ पूरी ईमानदारी बरती है। इरफान खान और कोंकणा सेन ने बेहतरीन काम किया है। शरमन जोशी में थोड़ी परिपक्वता दिखी है। धमेंद्र और नफीसा अली की जोड़ी अच्छी थी।

ओवरसीज में शिल्पा शेट्टी के नाम पर फिल्म जरूर चल रही है। भावनाओं के ताने-बाने पर बुनी और भारत के बड़े शहरों की जिंदगी को चित्रित करती फिल्म मेट्रो अच्छी बनी है।

कल बड़े दिनों बाद मैं थिटेटर में जाकर फिल्म देख पाया।

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‘परवीन तू है बड़ी नमकीन’: पाक का एक विवादित गाना

भाई मैंने गाना सुना है, बड़ा मस्त गाना है। लेकिन परवीन को कहना भी अपनी जगह सही है। अबरारुल हक का कहना भी अपनी जगह सही है। खैर बात अब पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट में है। यूट्यूब के इस विडियो में को देख कर भी समझ जाएंगे कि विवाद आखिर कैसे उठा। आपके पास अगर स्पीकर/ईयर फोन हो तो गाना सुनिए और मस्त रहिए।

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इसपर बीबीसी की यह रिपोर्ट

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