पहले ही वनडे में नीरज पांडे का शतक: A Wednesday

हरेक फिल्म देखने के बाद मैं अपने एक दोस्त को फिल्म के बारे में मैसेज करता हूं। वेडनसडे देखने के बाद मैंने लिखा, Superb Direction and Outstanding Acting by Legend Duo.
आप लोगों ने फिल्म नहीं देखी है तो जाकर देखिए थियेटर में जाकर। जिन्हें पाईरेसी से परहेज नहीं हैं घर पर डीवीडी लाकर देखिए।

जब कोई नसीरुद्दीन शाह और अनुपम खेर के बारे में कहते हैं कि ये लोग कमाल के एक्टर हैं और आपको उनकी बात नहीं समझ में आती है तो यह फिल्म देखिए कमाल के एक्टर होने का मतलब समझ में आ जाएगा।

यह फिल्म आपको थियेटर की कुर्सी से उठने नहीं देगी। फिल्म की जान है इसका संवाद, निर्देशन और हमेशा एक अजीब सा चलने वाला बैकग्राउंड म्यूजिक।

आतंकवाद से लड़ने वाले साधारण इंसान की कहानी जो मैं, आप, आप, आप… कोई भी हो सकता है। कोई भी.. यह साधारण इंसान भी हमारे आपके तरह ही घुटता रहता है, बर्दाश्त करता रहता है और एक दिन वह…. फिल्म जाकर देखिए मैं नहीं बताऊंगा।

फिल्म खुदा के लिए में नसीरुद्दीन शाह के अंतिम दस मिनट के डायलग और वेडनसडे के अंतिम दस मिनट के डायलग लोगों को, समाज को बदलने वाला है।

कई दिनों की बैचेनी थी ब्लाग लिखने की सो वेडनसडे ने दूर कर दी। Thanks to Naseer Ji, Anupam ji and Director Neeraj Pandey and The Whole Team of A Wednesday.

 Film Official Website: A Wednesday

जयपुर में ब्लास्ट, क्या इनका कोई पैटर्न होता है??

आतंकवाद का कोई पैटर्न नही होता. वो कही भी हो सकता है. वहा जहा ज्यादा से ज्यादा लोग हताहत हो. इनका काम होता है लोगो में खौफ पैदा करना. एक साथ पूरे राज्य पूरे देश में. इनका कुछ होता है या नही होता है नही मालूम लेकिन कोई धर्म कोई मजहब तो एकदम नही होता है. यह बच्चों, बुजुर्गो, मुसलमानो, हिन्दुओ सबसे घृणा करते हैं. भारत में यह हिन्दुओ को पाकिस्तान में मुसलमानों को, अमेरिका में ईसाईयो इनको नफरत है. यही है इनका पैटर्न.
यह लिस्ट आप लोगो को बताने के लिए काफी होगा की आतंकवाद की ना ही जात है ना ही कोई मजहब. कभी कही धमाका तो कही किसी प्लेन का अगवा. ये Destrctive Mind के होते हैं. बस यही है इनका पैटर्न.

बुद्धिजीवियों की लड़ाई

पहले दोनों शब्दों के बारे में जानना जरूरी है। बुद्धिजीवी और लड़ाई। सपाट शब्दों में कहूं तो कई विषयों की जानकारी रखने वाला या किसी भी विषय पर कम से कम आधा घंटे का भाषण तो दे ही दे, बुद्धिजीवी कहलाते हैं।

और लड़ाई तो ब्लागरों को पता होगा ही(यहां हर दूसरे महीने लड़ाई तो होती ही है)। लड़ाई कोई जरूरी नहीं है कि शारीरिक रूप से लड़ी जाए, शब्दों के अलावा ऐसे किसी भौतिक वस्तु का इस्तेमाल कर सामने वाले को आहत करना ही मेरे नजर में लड़ाई है।

अब मुद्दे की बात करता हूं। बात पिछले रविवार की है जब लोग तनाव में थे कि भारत आस्ट्रेलिया से पार पाएगा या नहीं। धोनी की टीम कंगारूओं को मात देने के लिए कमर कस रही थी और साथ ही करोड़ों जोड़ी आखें इस तनाव में भागीदार बनने को आतुर थी। उसी समय उर्दू प्रेस क्लब में फासिज्म एंड टेरररिज्म: टू साईड्स आफ द सेम क्वाईन मुद्दे पर बहस के लिए कुछ लोग इकट्ठा हुए थे।

इस पर बहस के लिए बुद्धिजीवियों की मंडली में जो गणमाण्य लोग आए थे, उनके नाम हैं: विहिप के सुरेंद्र जैन, इतिहासकार अमरेश मिश्र, नेशनल कांफ्रेंस सांसद एआर शाहीन, पत्रकार मनोज रघुवंशी, लेखिका अरुंधती राय और कौमी पार्टी के मोहम्मद हसनैन।

पूरा वर्णन मैं यहां नहीं दूंगा कि वहां क्या-क्या हुआ लेकिन कुछ खास बातें बता दूं। अरुंधती राय ने यह कहकर मंच में बैठने से मना कर दिया कि वह नेताओं के साथ मंच पर नहीं बैठती, वह दर्शकदीर्घा में ही बैठी। नेताओं से भरे इस मंच मंडली राम और प्रोफेट मोहम्मद को जो कुछ नहीं कहा जाना चाहिए वह सब कुछ कहा गया। तल्ख बातें हुई मनोज रघुवंशी और हसनैन के बीच। अंत हुआ पुलिस के आने के बाद। लोगों से सुनने में आया कि विहिप के कार्यकर्ता लाठियों के साथ रास्ते में खड़े हैं, जो अफवाह थी या सच, पता नहीं।

पूरा वर्णन पढ़ने के लिए आज का टाइम्स आफ इंडिया पृष्ठ संख्या 10 देखें।

वाह रे बुद्धिजीवी। आप भी जरा पढ़ लें।

एक कार्टून: पाकिस्तान कि सही तस्वीर

Pakistan real image

मैं आतंकवादी बनना चाहता हूं

terrorist jpg
मैं दिन भर में औसतन 20 से 30 कीवर्ड सर्च करता हूं। अपने मतलब की। लेकिन एक खबर और एक कीवर्ड main terrorist banna chahta hon, जो मेरे ब्लाग पर मुझे दिखा उससे मैं चौंक गया। रोमन में सर्च किया गया यह कीवर्ड गूगल से मेरे ब्लाग पर उपयोगकर्ता को लाया है।

मुझे नहीं पता कि उपयोगकर्ता इसे क्यों सर्च कर रहा था। लेकिन मैं जब यह खबर बना रहा था तब मुझे पता चला कि लोग इंटरनेट पर ऐसा भी कहीं पब्लिक डोमेन में रखते हैं।

यह एक भयावह सच है। हमें इसे समझना होगा।

जब मैं इस मामले में अपने एक दोस्त से बात कर रहा था तो उनका कहना था, 12:52 kripal:

12:54 abey ek search ke liye itna bawal :)

  barbad hain tu bhi

12:55 me: tujhe lagata hai ki ye ek serach hai

  mujhe lagta hai ki bahut badi baat hai

यह मैंने उनके सहमति के बाद डाला है।

कहने का मतलब है कि इसके प्रति हम सभी लोगों को थोड़ा गंभीर व सजग होना होगा।

एक कार्टून: काफी डरावना सच है

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ये पहला मौका है जब अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद में भारत का नाम सामने आया हैअभी आरोप साबित तो नही हुआ है लेकिन अगर यह होता है तो भारतीय सरकार के लिए ख़तरे की घंटी है

लाल मस्जिद, बुरका और कार्टून

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सभी में पांच, पाक पोर्टल पर छह की मौत

मुझे नहीं पता कि यह क्यों है लेकिन गुगल के न्यूज सर्विस पर जब मैंने हैदराबाद ब्लास्ट के बारे में देखा तो मुझे मिला कि ब्रिटेन, आस्ट्रेलिया, कनाडा वालों को मालूम है कि भारत के दक्षिण राज्य आंध्र प्रदेश में एक विस्फोट हुआ जहां पांच की मौत हो गई लेकिन हमारे पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के एक समाचार पोर्टल को जानकारी है कि छह लोग मारे गए। ऐसा कैसे हो सकता है?? मुझे लगता है कि इनका कुछ नहीं हो सकता है।

blast screenshot

खबर बदल ना जाए इसके लिए मैं इस पेज को स्कीनशाट लगा रहा हूं।

Dandi march aur Bombay bomb blast ki barsi

Dandi March 

In dono ghatnawo ne Bharat ko hila kar rakh diya tha. Ek aajadi ke pahle ki ghatna hai to ek aajadi ke baad ki. Ek ghatna bharat ke hit ke liye ki gai ek ghatna bharat ke ahit ke liye.

12 March 1930 ko Angrejo ke salt tax ke khilaf Gandhi ji ne Sabarmati Ashram se Dandi 24 din tak 240 miles paidal chale aur namak bana kar kanoon ka virodh kiya.

1993 Mumbai bomb blast

12 March 1993 ko aatankvadiyo ne Bombay mein ek ke baad ek 15 dhamake kiye. Jiske baad se pura bharat ab tak dahal raha hai. 257 log maare gaye, 1400 se jyada log ghayal hue.

Dandi march ko hue 77 saal aur Mumbai bomb blast ko hue 14 saal beet chuke hain. Tab ke bharat aur ab ke bharat mein bahut kuch badal chuka hai. Neta badal chuke hain, pehle ke neta bharat ke baare mein sochte the aur ab ke neta apne baare mein sochte hain.

Phir bhi bharat bahut badla hai. Sabhi log kuch na kuch dekh rahe hain. Sab ka apna apna matlab hai. Kisan apne ko dekhne ke baad neta ko dekh rahe hain. Kaamgaar sarkaar ki nitiyo ko dekh raha hai. Neta kewal apne aap ko dekh rahe hain. Videshi India ki economy ko dekh raha hai. Kyonki India shine kar raha hai.

Everyone is calling India!! India!! India!!

Divide Pakistan!!!

Cover of Divide Pakistan

Subah Subah newspaper khola to Times of India ke below fold par ek 4 column khabar “Solution to global terror: Split Pak into 5″ dekha. Syed Jamaluddin ne ek kitab likhi hai Divide Pakistan to Elimminate Terrorism. Is kitab ki bikri ke liye 15 seconds ka advertisment banaya gaya hai jo CNN par dikhaya ja raha hai.

Kitab mein forumla ke roop mein kaha gaya hai ki pakistan ko 5 parts mein baant dena chahiye. Sindhudesh, Jinnahpur, Balochistan, Pakhtunistan aur Punjabistan. Kya ye $15.95 ki book ko bechne ki tarkib hai ya fir Jamaluddin sach mein terrorism ko mitana chahata hai? Kuch sochne se pehle ye jaan le ki CNN par prime time mein advertisment dene ka charge hai $ 20,000 for 30 Sec. For more Check this blog dividepakistan.blogspot.com

Well i can say only one thing idea is not bad. :)