..ओ रियली।

अग्रेंजी कृपाल की विचार भाष नहीं थी लेकिन उसके टीचर ने उसे यही कहा था कि ट्राई टू स्पीक इन इंग्लिश।

यस आई हैव एन एप्पल आई पाड, शोभन ने कहा

व्हाएट इज द कोस्ट? कृपाल ने टीचर को याद करते हुए कहा।

हंड्रेड एंड थट्री एट यूएसडी।

यूएसडी!!! व्आहट डस इट मीन?

यूएस डालर!!!

कृपाल को नए गजेट्स का जानने का शौक था और उससे ज्यादा अंग्रेजी बोलने का।

अंग्रेजी तो वह बोलता था लेकिन यह उसका थाउट प्रोसेस लैंग्वेज नहीं था। कभी-कभी वह, ही डोंट नो भी बोल जाता था, फिर मन में ही उसे एक बार दोहराता, ही डोंट नो नहीं ही डस नौट नो, डस!!!

उत्तर प्रदेश के मुगलसराय शहर से 40 किमी पश्चिम में उसका गांव था, था इसलिए क्योंकि वह अपने पिता के साथा जालंधर में रहता है। अपने दोस्तों को भी उसे यह बताना पसंद नहीं है कि वह उत्तर प्रदेश का है।

हां!! एक बार जब वह दिल्ली आने के लिए बस से सफर कर रहा था तो कुछ अजनबियों से मुगलसराय स्टेशन की बातें सुन रहा था, तो उसे लगा कि वह कह दे कि मैं तो मुगलसराय का हूं।

पंजाबी तो वह फर्राटेदार बोलता है। कृपाल जब भी यह फर्राटा शब्द सुनता उसे अखबार की एक शीषर्क और कई लिखी बातें याद आने लगती..

लूटेरे ने दो को लूटा
..फर्राटेदार अंग्रेजी और स्पेनिश बोलने वाले लूटेरे ने नशीला खाना खिलाकर दो लोगों से नकदी व जेवर लूटे।

अपनी ही धुन में खोया रहने वाला कृपाल कई लोगों से प्रभावित हो जाता।

सड़क पर मर्सीडीज बेंज देखने के बाद मन में दोहराता, मर्सीडीज बेंज। दिल्ली आता तो वरसांचे का शो रूम के बाहर थोड़ा देर रूककर उसे निहारता, फिर आगे बढ़ता।
क्रमश: