दुनिया की दस बड़ी समस्याएं…

पीने का साफ पानी
उर्जा स्रोतों की कमी
जनसंख्या विस्फोट .. से आगे की बात करते हैं

अमीरी-गरीबी में बढ़ती खाई
मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज का वर्तमान बाजार मूल्य 3,50,000 करोड़ रुपये है। विदर्भ में 1000रुपये का कर्ज ना चुका पाने वाले एक किसान ने आत्महत्या कर ली। इससे भयावह मंजर और कहीं नहीं हो सकता। हम पढ़ते हैं और भूल जाते हैं लेकिन आज भी विदर्भ और विश्व के कई हिस्सों में गरीबी के कारण लोग भूखे सोएंगे। यह बाजार और पूंजीवाद का गणित है, जो नई दिक्कत के रूप में सामने आ रहा है। रवांडा, घाना, म्यांमार, हैती यहां तक की भारत में भी इसको सहज रूप में देखा जा सकता है।

परमाणु हथियार
पाकिस्तान ने हत्फ-4 का सफल परीक्षण किया। भारत ने बीजिंग तक मार करने वाले अग्नि मिसाइल का सफल परीक्षण किया। अखबारों में तो आप पढ़ते ही होंगे। भारत ने स्माइलिंग बुद्धा (1974) से इसकी शुरुआत की। रूस ने 1945 में ही पहला परमाणु परीक्षण किया था। अब तक आठ देश परमाणु हथियार संपन्न देश बन चुके हैं। इस्राइल और ईरान कतार में हैं।

nagasaki blast

परमाणु हथियारों के प्रभाव के बारे में जानने के लिए यह तस्वीर काफी होगी। मालूम हो कि नागासाकी में किए गए विस्फोट की यह तस्वीर आज के परमाणु बमों से काफी कमजोर थी। यह समस्या रोज खड़ी हो रही है, विकराल और विकराल, फ्यूजन रिएक्शन की तरह..।

सेक्स का वहशीपना और समलैंगिकता

अमेरिका की एक सीनेटर ने कह दिया समलैंगिकता आज की सबसे बड़ी प्राब्लम है, आतंकवाद से भी बड़ी। लगता भी है. मुझे लगा सो मैंने लिख दिया बाकि आप लोगो की राय से कुछ पता चलेगा की आप लोग क्या सोचते हैं.

समस्या अभी और भी हैं… अगले पोस्ट में.

झूठ बोलतीं हैं महिलाएं..

हां, यही सच है, अधिकांश महिलाएं झूठ ही बोलती हैं। साथ में शराब भी पीती हैं, कपड़े भी भड़काऊ पहनती हैं और झूठ भी बोलती हैं।

यही कहा जा रहा है ब्रिटेन में। एक रिपोर्ट के मुताबिक बलात्कार के 100 मामले में केवल 5 मामले में आरोपी दोषी साबित हो पाता है। इसकेउलट महिलाओं पर इल्जाम लगता है कि वह बलात्कार को लेकर झूठ बोलती हैं।

यह वही ब्रिटेन है, जहां के कानून पूरे विश्व के कानून को एक दिशा देता है। वकील और जज वहां के केस की स्टडी करते हैं।

एक रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटेन में हर साल बलात्कार के 14000 मामले सामने आते हैं, जिसमें से हर 20 में से 19 आरोपी रिहा हो जाते हैं।

इसके पीछे कैसी-कैसी दलील दी जाती हैं, जरा गौर फरमाएं:
बलात्कार का कोई चश्मदीद नहीं होता है।
किसी भी क्लोज शर्किट कैमरे में कोई तस्वीर नहीं मिलती।
लड़की खुद नशे में होती है।

यह कोर्ट में कही जाती हैं, जो बाहर कही जाती हैं, कुछ स्टीरियोटाईप ही है

लड़की ने भड़काऊ कपड़े पहने हुए थे।
लड़की ने उत्तेजित किया था।
उसपर से यह बात कही जाती है कि बढ़ते हुए बलात्कार के केस को देखते हुए छेड़छाड़ और ऐसी ही घटनाओं पर पुलिस ज्यादा तवज्जो नहीं देती।

नोट: मैने जो कुछ भी लिखा है, वह न्यूयार्क टाइम्स की रिपोर्ट और वाल स्टीर्ट जर्नल पर लिखे गए एक ब्लाग को पढ़कर लिखा है।

रेड लाईट एरिया की सेक्स वर्कर

Red Light Areaकोई हर दिन मारा जा रहा है
…और कोई इसे ही लाइफ बन गई बता रहा है
ये बुझने के बाद और भड़कने वाली आग है
कोई जानबूझकर तो कोई जबरदस्ती झोंका जा रहा है.
ये मर्ज है या दवा?
इसकी खोज ख़बर किया नही जा रहा है.
डाक्टर अनुराग जी के पोस्ट से प्रेरित 

कुछ स्टीरियोटाईप सोच

इत्र केवल मुसलमान लगाते हैं।
मुसलमान भारत को नहीं पाकिस्तान को पसंद करते हैं।
बिहारी चालाक और राजनीति करने वाले होते हैं।
सभी लड़कियां सेक्सी होती हैं।
पुलिस हमेशा खराब होता है।
नेता कभी वादा नहीं निभाते।
औरतें खूब बोलती हैं।
युवा लड़कियां मोबाइल फोन पर सबसे ज्यादा बात करती हैं।

मैं ऐसा नही सोचता। कैसे? पूरा पोस्ट पढ़िये।

चांदनी चौक में रहने वाले शर्मा जी दरीबां की एक छोटी सी दुकान से अपने एक रांची दोस्त (जो दूसरे शर्मा जी हैं) के लिए इत्र खरीदतें हैं। अपने रांची प्रवास के दौरान शर्मा जी सबकुछ भूल जाएं, इत्र नहीं भूलते।

इत्र कोई भी लगा सकता है। शर्मा जी भी और अख्तर साहब भी।

अखबार के एक दफ्तर में पहले ट्वेंटी-20 फाइनल का टीवी में प्रसारण चल रहा था। मुकाबला था इतिहास में एक ही देश कहलाने वाले और वर्तमान के तथाकथित दो दुश्मनों देशों के खिलाफ। मैच का अंतिम ओवर धोनी के चहेते जोगिंदर शर्मा कर रहे थे.. आखिरी गेंद.. और भारत मैच जीत गई। पाकिस्तान हार गया। दफ्तर में शांत रहने वाले मुसलमान नियाज ने हिंदू सोभन का गाल चूम लिया। ..और पैसे मिलाकर मिठाई मंगाई गई लेकिन मुसलमान नियाज ने सबसे ज्यादा 100 रुपये मिलाए।

भारतीय मुसलमान भारत को प्यार करते हैं और वह भारतीय क्रिकेट के सबसे बड़े प्रशंसकों में से एक होते हैं।
यूं तो इस आफिस में भी कुछ नया नहीं था। कुछ भी नया नहीं था से मेरा मतलब कि दिल्ली के हरेक आफिसों की तरह इसमें भी बिहारियों की संख्या सबसे ज्यादा थी। कोस्मोपोलिटन दिल्ली में वह कोस्मोपोलिटन पत्रिका नहीं पढ़ते। प्रवीण झा भी इसी आफिस का हिस्सा है। मध्यम वर्ग परिवारों में होने वाले मूल्यों को लेकर चलने वाला। आफिस में उसे लोग कभी-कभी झा.अुआ कह कर पुकारते। इसका तुक तो प्रवीण को भी नहीं समझ में आता। झा को झा.अुआ कहना, समझ से परे की चीज है। उसकी प्रकृति उसकी निजी थी, किसी प्रांत और इलाके से अलग(सभी की प्रकृति उसकी निजी व्यवहार पर ही होती है, प्रांत और इलाके से अलग)।

बिहारी भी सीधे होते हैं और राजनीति को समझते हैं और नहीं भी समझते।

तीसरे माले में रहने वाले कुछ लड़के तो सड़क से आने जाने वाली हर लड़की को सेक्सी कहते। उनके जेहन में लड़कियां सेक्सी ही होती हैं, जैसा कुछ बैठा हुआ है।

बस में चलते हुए उसी तीसरे माले में रहने वाले एक लड़का, विकास का सामना एक लड़की से हुआ। जिसके बाद वह बस से यह बुदबुदाते हुए उतरा, इसके तो सिंग उगे हुए थे, लड़ने को ही घर से निकली थी।

हुआ कुछ यूं था। बस ने हल्का हिचकोला खाया और विकास का जूता, लड़की के बस की फर्श पर रगड़ खा रही दुप्पटे को खिंच गया (अनजाने में हुआ था यह)। दुप्पटा पूरा नीचे। लड़की ने उसे देखते हुए कहा, आंखे नहीं हैं क्या? देख कर नहीं खड़े हो सकते हैं क्या?
अगले स्टाप पर बस में भीड़ थोड़ी और बढ़ गई। बस ने एक हिचकोला और खाया। विकास लड़की से टकराते-टकराते.. टकरा ही गया। कुछ अंग्रेजी और हिंदी, लड़की ने विकास को इतना सुना दिया कि सभी यात्री विकास को ही देखने लगे। अगला स्टाप विकास का स्टाप था। वह कुछ बुदबुदाते हुए उतर रहा था।

बाकी की बातें अगले पोस्ट में लिखूंगा

आतंकवाद से बड़ा खतरा है समलैंगिकता

अब यह कितना बड़ा खतरा है इसका केवल अंदाजा भर लगाया जा सकता है। लेकिन अंदाजा लगाने का पैमाना क्या हो, इस पर थोड़ी जिरह हो सकती है।

किसी ने कहा है कि किसी देश को बरबाद करना हो तो वहां के युवा वर्ग को बरबाद कर दो देश खुद ब खुद बरबाद हो जाएगा।

बात हो रही है समलैंगिकता की। अमेरिका में ओकलाहोमा सिटी की रिपब्लिकन सैली कर्न ने कहा कि अमेरिका के लिए आतंकवाद और इस्लाम से भी बड़ा खतरा समलैंगिकता है।

क्या यह खतरा है? अगर यह खतरा है तो क्या सचमुच इतना बड़ा खतरा है?

समलैंगिकों को मानना है कि यह एक तरीके की आजादी है। अगर हम आजाद हैं तो हमारी अपनी आजादी भी होनी चाहिए। हम चाहें जिसके साथ चाहें रहें, सरकार को इसमें कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए।

सरकार का कहना है कि यह प्रकृति के खिलाफ इसलिए इसका कोई आधार नहीं है और यह अवैध है।

सरकार और समलैंगिकों की इस लड़ाई के बीच 2001 में सबसे पहले नीदरलैंड ने समलैंगिकों के विवाह को कानूनी मान्यता दी। उसके बाद बेल्जियम, कनाडा, दक्षिण अफ्रीका, और स्पेन ने भी समलैंगिकों के आगे घुटने टेके। अमेरिका में यह लड़ाई 50 राज्यों में लड़ी जा रही है। कई राज्यों में मान्यता मिल चुकी है और कई इस ओर अग्रसर हैं।

भारत में इसका प्रभाव समाज के हर क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। फिल्में बन रही हैं, विश्वविद्यालयों में बहस कराए जा रहे हैं, किताबें लिखी जा रहीं हैं।

अभी तक भारत में इसके आभास भर से दोस्त यार फब्तियां कसते नजर आते हैं। मुझे नहीं पता कि यह इसके होने से भारत का युवा वर्ग कब गर्व करने लगेगा। इसके एहसास से ही एक कंपन सी होती है। मेरी निजी राय के मुताबिक मैं इसका विरोध तो नहीं कर सकता लेकिन इसको प्रोत्साहन कभी नहीं दूंगा।

सिप्ला की गर्भ निरोधक गोली आई-पिल

इसका टीवी एड देखा। काफी शांत। कोई शोर-शराबा नहीं। पति-पत्नी के बीच आंखों-आंखों में बातें होती हैं और उसके बाद आई-पिल का जिक्र।

कुछ बात करने से पहले कुछ आंकड़े बता दूं। भारत में..
प्रतिवर्ष 50 लाख गर्भपात कराए जाते हैं।
78 प्रतिशत गर्भधारण अनियोजित होते हैं।
25 प्रतिशत गर्भधारण अनिच्छित होते हैं।

ऐसा नहीं है कि इससे पहले महिलाओं के लिए कोई गर्भनिरोधक दवाई बाजार में नहीं आई है। लेकिन सिप्ला की यह गोली खास है। गर्भधारण के 72 घंटे बाद लेने से गर्भपात हो जाएगा। यह इसकी खास और सबसे खास बात है।

इसके फायदे का तो पता नहीं लेकिन हमारे तेजी से बदलते भारत में इसका नुकसान काफी तेजी से होगा।

सिप्ला की वेबसाइट पर नीचे गुलाबी रंग से साफ-साफ लिखा हुआ है, इसका उपयोग बिना डाक्टरी सहायता के भी लिया जा सकता है। हां, साथ ही कंपनी ने यह भी लिखना नहीं भूला है कि यह गोली गर्भपात की गोली नहीं है।

भारत में जहां नाम भर लिख लेने वाले को साक्षर कहा जाता है, वहां शिक्षा मात्र 64 प्रतिशत है। अब उन्हें इसका अच्छा-बुरा कौन समझाएगा?

जितना शांत इसका टीवी एड है इसके ठीक उलट बाजार में इस गोली का हल्ला होगा। गर्भपात पर एक रिपोर्ट

Official site i-pill

बदलता भारत: टाइम्स आफ इंडिया की तीन खबरें

हमारा भारत विकास कर रहा है। इसको मापने का मीटर सेंसेक्स। जो आज 16000 के पार चला गया। कल यह खबर बिजनेस पेज से निकलकर पहले पन्ने पर आ जाएगी। और रनडाउन में इसकी जगह पहले खबर के रूप में ली जाएगी।

लेकिन आज टाइम्स आफ इंडिया के दिल्ली संस्करण में तीन खबरें इस विकास कर रहे भारत के समाज पर धक्का लगाती है।

पहला, देश के सबसे बड़े निजी बैंक आईसीआईसीआई के लोन रिकवरी एजेंटों ने मुंबई के एक आदमी को इतना परेशान और धमकाया कि वह आत्महत्या करने को मजबूर हो गया। महज 50000 रुपये के लिए।

दूसरा, दिल्ली हाई कोर्ट ने एक लड़के और उसकी पत्नी को अपने बूढ़े माता-पिता को धमकाने के जुर्म में समन जारी किया है।

तीसरा, उड़ीसा की महिला आयोग ने माना है कि राज्य में महिलाएं पुरुषों को प्रताड़ित कर रही हैं। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक अब तक 38 ऐसे मामले रजिस्टर किए गए हैं।

भारत तेजी से बदल रहा है। विकास की बयार चारों ओर बह रही है। लेकिन इसकी हवा में कुछ तो ऐसा घुल जो हमारे समाज को थोड़ा अस्वस्थ कर जाता है।

काम का दवाब और विकास की होड़ में अच्छे-बुरे को भुलते जा रहे हैं। ग्लोबलाईजेशन में हम अपने दिमाग पर काबू नहीं कर पा रहे हैं। पैसा हमारी सबसे बड़ी जरूरत के रूप में उभर कर आ रहा है। चाहे इसके लिए किसी को कुछ भी करना पड़े।

मीडिया का उदाहरण देकर समझा सकता हूं। अखबार अश्लील तस्वीरों के जरिए अपना सकरुलेशन बढ़ाना चाहता है। टीवी दुष्कर्म के सीन दिखाकर। और इंटरनेट में संता बंता को का होम पेज यह बताने के लिए काफी है कि हम क्या परोस रहे हैं। पैसा..पैसा..और पैसा।

पैसा जरूर कमाइए लेकिन पहले मन की शांति जरूरी है।

भारत में Gay और Lesbian संस्कृति का हमला

जब मैं यह संस्कृति लिखता हूं इसका मतलब है कि यह हमारे रोज मर्रा की आदतों में शुमार हो रहा है। और यह हमला है या नहीं यह तो आपके देखने का नजरिया बताएगा।

जिनको इस बारे में नहीं पता विकिपिडिया की यह लिंक उनके लिए महत्वपूर्ण है।

आज के फैशन के साथ हर तीसरी फिल्म में गे के बारे में दिखाया जाता है। कोंकणा सेन तो इस खासी परेशान है। पहले पेज थ्री फिर मेट्रो।

मैं शूटआउट एट लोखंडवाला देखने नोएडा के पीवीआर गया था। देखा एक लंबे बालों वाला पुरुष जिसने अपने होठों पर कुछ पहन रखा था। अब उसे कानबाली तो नहीं ही कहेंगे शायद होठबाली भी नहीं। अब यह फैशन की मार है या ..।

नीदरलैंड, बेल्जियम, स्पेन, कनाडा और दक्षिण अफ्रीका में तो एक लिंग के साथ विवाह को कानूनी मान्यता मिल गई है। कई जगहों पर बहस चल रही है। अमेरिका के मैसाच्चुएट्स में भी इसको कानूनी मान्यता मिली है लेकिन पूरे अमेरिका में इसके लिए लड़ाई लड़ी जा रही है।

अब अगर हम थोड़ा संकुचित सोचे तो यह होगा कि बाहर में क्या हो रहा इससे हमे क्या? लेकिन फैशन तो अब इंटरनेट के माध्यम से भी चल रहा है। और मुमकिन है कि आने वाले कुछ सालों में भारत में भी इसके कानूनी रूप के लिए आवाजें उठेंगी।

हमारे पड़ोसी राष्ट्र पाकिस्तान ने तो ऐसी शादियों को अवैध ठहरा दिया है। भारत में ऐसी शादियां आए दिन मीडिया की जुबानी हम सुनते रहते हैं। लेकिन पता नहीं आज की युवा किस दिन यह सीमा तोड़ेगी और कहेगी हमें चाहिए कानूनी हक। समय का इंतजार कीजिए, यह जल्द ही होगा।

हिन्दू धर्म क्या है: सेक्स या मुक्ति । क्या हम बात कर सकते हैं??

bloमेरे एक करीबी मित्र हैं जो भारत और भारत से जुड़ी अनेक चीजों पर बहुत गर्व करते हैं। मैं भी करता हूं..लेकिन सभी चीजों पर नहीं। खैर, मेरे उस दोस्त को विदेश की कुछ अगर पसंद है तो वह है वहां की फिल्में। जी सिनेमा नहीं जी एमजीएम देखता है। साथ ही स्टार मूवीज और एचबीओ। अब उसके पीछे उसकी मानसिकता मैं नहीं जानता या फिर मौन रहना चाहता हूं।

दोहे तो उसे खूब याद हैं, चौपाई भी। एक घंटे की बातचीत में रामायण, महाभारत के कई प्रसंग सुना देता है। धर्म की बात करने पर हिन्दू को सबसे पुराना धर्म बताते हुए एक श्लोक सुना देता है। बाकी धर्मो के बारे में.. नेक ख्याल तो नहीं रखता है।

हम दोनों सुबह-सुबह CNN पर एक प्रोग्राम देख रहे थे.. Anderson Cooper 360। उस स्पेशल प्रोग्राम में बात हो रही थी ‘ईसाईयत क्या है: सेक्स या मुक्ति।’ मैंने उससे कहा कि ‘हिन्दू धर्म क्या है: सेक्स या मुक्ति’। गुस्से में आकर मुझे ना जाने क्या-क्या बोल बैठा। मैंने कहा क्या मुझे यह प्रश्न पूछने का भी अधिकार नहीं है। उसने कहा तुम जानते क्या हो हिन्दू धर्म के बारे में। टीवी देखकर कुछ भी पूछ देते हो। तो मैंने कहा कि भगवान करे तो लीला और मैं करूं तो सेक्स और भोग।

सीएनएन के इन तीनों प्रोग्राम के स्क्रिप्ट आनलाइन हैं जो यहां देखे जा सकते हैं। क्लिक, क्लिक, क्लिक

मैं यह पूछता हूं कि क्या हमें धर्म के बारे में सीएनएन की रिपोर्ट की तरह नहीं बात करनी चाहिए। क्या पहले जो बातें लिखी गई हैं, उसी को सत्य मानते हुए उसकी पूजा करनी चाहिए। मैं विश्वासी हूं अंधविश्वासी नहीं। चाहे वो मामला धर्म से जुड़ा ही क्यों ना जुड़ा हो।

|