भावनाएं और संवेदनाएं जम जाती होंगी!

कई बार भूल जाता था वह। उसे जाने का रास्ता याद होता था लेकिन लौटने का..।

ऊंची-ऊंची इमारतों को निशान रूप में देखता था। वह बोर्ड.. जो बताती थी कि नई दिल्ली रेलवे स्टेशन का रास्ता मुखर्जी से नगर से राजघाट की ओर आते हुए दाहिने कटेगी..
आह! रेलवे स्टेशन.. घर की याद आती थी उसे। अभी दो महीने होने में तीन दिन बाकी हैं। गहरे डूब जाता था, घर की याद में। तिस पर दिल्ली की उमस भरी गर्मी।

सर्र..सर्र.. बगल से जाती गाडि़यों की आवाज ने उसका ध्यान तोड़ा। शांति वन बस स्टाप पर मुद्रिका का इंतजार कर रहा था। किसी ने बताया था कि मुद्रिका का मतलब जो चक्कर लगाती है। गोल-गोल। अंगूठी के गोलाकार की तरह। और फिर, जहां से चली थी वही आकर मिल जाती हो।
वह भी मुद्रिका बन जाना चाहता था।

तभी बस आ गई। कई लोगों के साथ मैं भी सवार हुआ। बस खाली ही थी। सभी सीट पर लोग बैठे हुए थे। कुछेक लोग खड़े थे। एक वृद्धा भी। अपने लाठी और सीट के हैंडल को पकड़ कर खड़ी थी। महिलाओं की तरफ वाली सीट में सभी महिलाएं और बाकी सीटों पर पुरुषों का कब्जा था। किसी ने खड़ा होना मुनासिब नहीं समझा।

frozen ground

कैसा अजीब शहर है!
भावनाएं और संवेदनाएं भाप की तरह उड़ जाती हैं। कहीं नजर ही नहीं आता।
सोचता हूं..
जनवरी में क्या होता होगा?
शायद भावनाएं और संवेदनाएं जम जाती होंगी!

मैं और पेड़

अपने आस पास के पेड़ो को देखकर कई बार कुछ सोचता हूं। कैसे कैसे पेड़। उन्हीं पेड़ों की प्रकृति और मेरी प्रकृति की घालमेल है यह कविता…

cactus and desert

मैं पीपल बनना नहीं चाहता,
बड़ा ही सामंती पेड़ है।
औरों को बढ़ने ही नहीं देता।

मैं बोंस्आई की किस्म बनाना भी नहीं चाहता,
चाहता हूं कि प्रकृति ने जिसे जो दिया वह उसे मिले
अपनी बांहे फैलाएं, वह टहनियां, जिसे विज्ञान रोकता है।

मैं कैक्टस बनना चाहता हूं,
कम संसाधन में अपनी जिंदगी को जिऊं
रेगिस्तान में लोगों को आशातीत करता रहूं , जिंदगी यहां भी संभव हैं।

दुनिया की दस बड़ी समस्याएं…

पीने का साफ पानी
उर्जा स्रोतों की कमी
जनसंख्या विस्फोट .. से आगे की बात करते हैं

अमीरी-गरीबी में बढ़ती खाई
मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज का वर्तमान बाजार मूल्य 3,50,000 करोड़ रुपये है। विदर्भ में 1000रुपये का कर्ज ना चुका पाने वाले एक किसान ने आत्महत्या कर ली। इससे भयावह मंजर और कहीं नहीं हो सकता। हम पढ़ते हैं और भूल जाते हैं लेकिन आज भी विदर्भ और विश्व के कई हिस्सों में गरीबी के कारण लोग भूखे सोएंगे। यह बाजार और पूंजीवाद का गणित है, जो नई दिक्कत के रूप में सामने आ रहा है। रवांडा, घाना, म्यांमार, हैती यहां तक की भारत में भी इसको सहज रूप में देखा जा सकता है।

परमाणु हथियार
पाकिस्तान ने हत्फ-4 का सफल परीक्षण किया। भारत ने बीजिंग तक मार करने वाले अग्नि मिसाइल का सफल परीक्षण किया। अखबारों में तो आप पढ़ते ही होंगे। भारत ने स्माइलिंग बुद्धा (1974) से इसकी शुरुआत की। रूस ने 1945 में ही पहला परमाणु परीक्षण किया था। अब तक आठ देश परमाणु हथियार संपन्न देश बन चुके हैं। इस्राइल और ईरान कतार में हैं।

nagasaki blast

परमाणु हथियारों के प्रभाव के बारे में जानने के लिए यह तस्वीर काफी होगी। मालूम हो कि नागासाकी में किए गए विस्फोट की यह तस्वीर आज के परमाणु बमों से काफी कमजोर थी। यह समस्या रोज खड़ी हो रही है, विकराल और विकराल, फ्यूजन रिएक्शन की तरह..।

सेक्स का वहशीपना और समलैंगिकता

अमेरिका की एक सीनेटर ने कह दिया समलैंगिकता आज की सबसे बड़ी प्राब्लम है, आतंकवाद से भी बड़ी। लगता भी है. मुझे लगा सो मैंने लिख दिया बाकि आप लोगो की राय से कुछ पता चलेगा की आप लोग क्या सोचते हैं.

समस्या अभी और भी हैं… अगले पोस्ट में.

झूठ बोलतीं हैं महिलाएं..

हां, यही सच है, अधिकांश महिलाएं झूठ ही बोलती हैं। साथ में शराब भी पीती हैं, कपड़े भी भड़काऊ पहनती हैं और झूठ भी बोलती हैं।

यही कहा जा रहा है ब्रिटेन में। एक रिपोर्ट के मुताबिक बलात्कार के 100 मामले में केवल 5 मामले में आरोपी दोषी साबित हो पाता है। इसकेउलट महिलाओं पर इल्जाम लगता है कि वह बलात्कार को लेकर झूठ बोलती हैं।

यह वही ब्रिटेन है, जहां के कानून पूरे विश्व के कानून को एक दिशा देता है। वकील और जज वहां के केस की स्टडी करते हैं।

एक रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटेन में हर साल बलात्कार के 14000 मामले सामने आते हैं, जिसमें से हर 20 में से 19 आरोपी रिहा हो जाते हैं।

इसके पीछे कैसी-कैसी दलील दी जाती हैं, जरा गौर फरमाएं:
बलात्कार का कोई चश्मदीद नहीं होता है।
किसी भी क्लोज शर्किट कैमरे में कोई तस्वीर नहीं मिलती।
लड़की खुद नशे में होती है।

यह कोर्ट में कही जाती हैं, जो बाहर कही जाती हैं, कुछ स्टीरियोटाईप ही है

लड़की ने भड़काऊ कपड़े पहने हुए थे।
लड़की ने उत्तेजित किया था।
उसपर से यह बात कही जाती है कि बढ़ते हुए बलात्कार के केस को देखते हुए छेड़छाड़ और ऐसी ही घटनाओं पर पुलिस ज्यादा तवज्जो नहीं देती।

नोट: मैने जो कुछ भी लिखा है, वह न्यूयार्क टाइम्स की रिपोर्ट और वाल स्टीर्ट जर्नल पर लिखे गए एक ब्लाग को पढ़कर लिखा है।

आसमानी मखलूक: मदर टेरेसा

यह पोस्ट इसलिए भी अभी जरूरी है कि एक तो रक्षंदा जी ने इतना संजीदा पोस्ट लिख दिया। साथ ही हमेशा कि हिंदी ब्लोगिंग में गैर जरूरी बहसें चलायमान है। वह भी एक नहीं एक साथ तीन-तीन। तीनों का छीछालेदर होना बाकी है। अभी कई सारे पोस्ट और कमेंट इंतजार कर रहे होंगे।

खैर!! उससे कहीं जरूरी यह विडियो है, आज भी है और हमेशा रहेगी। आप इसको देखें। 

रक्षंदा जी के पोस्ट से प्रभावित

शहर का सहरा बनना

metro citiesसहरा काट कर शहर बना
लेकिन…
हंसी है लेकिन बनावटी
बातें हैं लेकिन बतकही नही
दोस्त हैं लेकिन मतलबी
अपने हैं लेकिन अपनापन नही

यही मिजाज है शहर का. यह शहर नही सहरा होता जा रहा है

रवीश को पढने के बाद ये ख्याल आए सो उंगलिया चल निकली

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सहरा: जंगल

संवेदनाओं का मरना क्या होता है?

एमबीबीएस मुन्नाभाई ने कहा, यह शरीर है। प्रयोग करने की प्रयोगशाला नहीं।
प्रोडक्ट और लैब की तरह इसका उपयोग हो रहा है।
दो रुपये और दो जान के खेल में एक लाख का मुआवजा
इस खबर पर आंखों से आंसू भी नहीं निकलते।
केवल दिल से निकलती है एक आह!
क्या संवेदनाओं का मरना इसी खबर को कहते हैं?

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