कलाकार के कई रूप होते हैं पत्रकार भी कलाकार है लेकिन मेरा मानना है कि पेंटिंग कला की सबसे मुश्किल विधा है। आपको कलाकृतियों और रंगों के मेल से अपनी सारी बात कहनी होती है। कोई शब्द नहीं, कोई आवाज नहीं।

मीनाक्षी भाभी से कई बार मिल चुका हूं और कई बार उनकी मधुबनी पेंटिंग को देख चुका हूं। Sushil का लिखा भी कई बार पढ़ा है। लेकिन रंगों ने हमेशा शब्दों को मात दी है (सुशील और मी‌नाक्षी भाभी के संदर्भ में)। इस बार भी। ब्लॉग के शब्द और वाक्य जितने सुंदर हैं उससे कहीं ज्यादा खूबसूरत और मन को मोहने वाली है यह पेंटिंग।

इधर कई दिनों से मन में एक दबी इच्छा सी है कि मैं भी कूची पकड़ूं।

Pankaj सर और Shradha मैम से भी कई बार मिल चुका हूं। शायद सुशील और मीनाक्षी भाभी से ज्यादा लेकिन वो दोनों दोस्त नहीं हैं। JIMMC Connect के मीडिया इंस्टीट्यूट में मैं तब पढ़ता था। और ये दोनों हमें पढ़ाने आते थे।

Deepti यह देखकर बहुत खुश होगी।

मीनाक्षी भाभी से एक रिक्वेस्ट रहेगा, जो शायद आने वाले दिनों में उन्हें बहुत बिजी कर दे— कि उन्हें मेरे घर को भी पेंट करना होगा।

मुझसे ज्यादा दीप्ति खुश होगी।