हमारे घर में पके हुए चावल को भात कहते हैं। अब वहां के भी बच्चों ने भात को चावल बोलना शुरू कर दिया है।

भात, रोटी, दाल, सब्जी खाकर ही बड़ा हुआ हूं। मेहमानों के स्वागत के लिए मीट (मटन), चिकन, मछली और अंडा बनता है।

पनीर का स्वाद मैंने पहली बार किसी ढाबे या होटल में किया होगा। दक्षिण भारतीय खाना भी बाहर खाया था। उसके बाद बर्गर और पित्जा भी। और आज मैक्रोनीएल्बो मैक्रोनी।Macroni

हमारे आफिस में मेरी वरिष्ठ सहयोगी हैं बबिता जी। उन्होंने पूछा मैक्रोनी खाओगे। मैंने तो पहली बार नाम सुना था, मैंने कहा क्या..?

उन्होंने दुबारा कहा, मैक्रोनी।
मैं विस्मित सा देखता रहा।
उन्होंने कहा झारखंडी ही रहोगे। दिल्ली आए हुए कितना समय हो गया और अभी तक मैक्रोनी नहीं जानते।

और फ़िर उन्होंने घर से बनाये हुए मैक्रोनी मुझे खाने के लिए दे दी

बबिता जी को धन्यवाद

तो भईया लोग हमने मैक्रोनी खा ली है, और अभी भी हम झारखंडी ही हैं। मुझे झारखंडी होने में गर्व है।