अगर चित्र कुछ बोलती है तो यह भी कुछ बोल रही है की जमाना बदल गया है

IPC section 489Aयह चित्र किस बारे में है यह समझ गए होंगे जो नही समझ पा रहे हैं वो माउस को फोटो के ऊपर ले जाए फोटो का जिस नाम से सेव किया गया है या एड्रेस बार में इसको देखे. इसके बारे में जानने की कोशिश करे. बड़ा भयावह है यह कानून जब इसका ग़लत उपयोग होता है.

यह चित्र पूर्वी दिल्ली के यमुना पुल को पार करने के बाद शकरपुर की पुलिस चौकी के सामने से लिया गया.

क्या है 123 समझौता और हाइड एक्ट?

सबसे पहले यह Hyde Act है ना कि Hide Act ।

यह दोनों मसले चर्चा-ए-आम है। हर कोई 123 समझौते के बारे में जानना चाहता है। अब वामदलों के विरोध के बाद लोगों में हाइड एक्ट को लेकर जागरूकता फैल रही है।

मैं पूरी कोशिश करूंगा कि इसे समझा पाऊं।

सबसे पहले चर्चा 123 समझौते की। भारत-अमेरिका के बीच जो एटमी समझौता हुआ है वह समझौता अमेरिका ने अपने एटमी कानून के अनुच्छेद 123 में संशोधन कर किया है। इस संशोधन के बाद अमेरिका किसी ऐसे देश से समझौता कर सकता है जिसने एनपीटी में हस्ताक्षर नहीं किया हो।

हाइड एक्ट का नाम इसके निर्माणकर्ता हेनरी जे हाइड के नाम के कारण पड़ा। इस समझौते का पूरा नाम अमेरिका-भारत शांतिपूर्ण एटमी ऊर्जा सहयोग एक्ट, 2006 है। हाइड एक्ट के तहत अमेरिका को भारत के साथ यह समझौता करने की छूट दी गई है, जिसने एनपीटी में हस्ताक्षर नहीं किया है। इसके तहत भारत अपने नागरिक हितों के लिए इसका सैन्य इस्तेमाल कर सकता है। अपने ऊर्जा संबंधी जरूरतों को पूरा कर सकता है।

हाइड एक्ट को कांग्रेस के हाऊस आफ रिपरशेंसटेटिव ने 68 के मुकाबले 359 मतों से और सीनेट ने 12 के मुकाबले 85 मतों से पारित कर दिया है।

अगर आप इस संबंध में और कुछ जानना चाहते हैं तो कृप्या इन लिंक्स को देखें। या फिर अपने कमेंट देकर पूछें..

व्हाइट हाऊस से जारी खबरें
हाइड एक्ट के बारे में कांग्रेस से जारी विज्ञप्ति (PDF File)
हिंदुस्तान टाइम्स पर संबंधित खबर
वीकिपीडिया पर समझौते का लेख
डेली पायनियर पर एक आलेख

भारत की कानून व्यवस्था बड़ी गहरी है!!!

Shibu Soren 

शिबू सोरेन रिहा हो गए और सलमान खान जेल भेजे गए। सलमान खान के जेले भेजे जाने पर किसी ने कहा कि भारत की कानून व्यवस्था बड़ी गहरी है। जो जैसा करेगा वैसा भरेगा। मैं अपने राज्य के वरिष्ठ नेता शिबू सोरेन के बारे में सोचने लगा..। सच में भारत की कानून व्यवस्था बड़ी गहरी है!!!

 Salman khan

चिट्ठा चोर या ‘भूखा’ चिट्ठेकार

देखने का नजरिया अलग है। किसी ने अगर आलोक पुराणिक जी के चिट्ठे से दो पोस्ट हू बहू कापी कर अपने चिट्ठे में डाल दिया तो क्या वह चोर हो गया? आप कहते होंगे, मैं उसे नहीं मानता। मैं उसे उसकी भूख मानता हूं।

आइडेंटिटी क्राइसिस की भूख। वह अच्छा लिखना नहीं जानता। क्रिएटिविटि नहीं है उसके पास। तो क्या करे! हम आप जो लिखते हैं उसका विचार हम अपने आस पास से लेते हैं। कोई कहीं के लिखे हुए एक लाईन से ही पूरी पोस्ट लिख देता है। कोई कुछ करता है तो कोई कुछ।

अभी कुछ दिन पहले मुझे एक चिट्ठेकार ने एक लिंक देकर यह बताया गया कि इस चिट्ठेकार ने कईयों की पोस्ट को अपने नाम से पब्लिश कर दी है। मैंने कहा यह तो बड़ी अच्छी बात है। मुफ्त में प्रचार हो रहा है। हां, वो अलग बात है कि आपका नाम नहीं दिया गया है। कोई बात नहीं। आपको पढ़ने वाले आपकी लेखनी को जानते हैं। नाहक आप परेशान ना होईए।

उन्होंने कहा कि यह तो गलत बात है कि बिना नाम दिए उसने यह सब काम कर दिया। मैंने कहा गलत तो है लेकिन आप कुछ कर नहीं सकते। और करना भी नहीं चाहिए। तब तक जब तक वह आपका प्रतियोगी ना बन जाए।

आपका लिखा हुआ पोस्ट अगर कोई दूसरा पब्लिश करता है तो वह बेचारा ‘भूखा’ है। आपने उसे खाना दिया है। ठीक है कि वह आपका नाम नहीं ले रहा है, लेकिन दिया आपने ही है। जिसे सब लोग जानते हैं।

इसलिए शोर मत मचाइए, भूखे को खाना देना पुण्य की बात है। खुश हो जाइए। इसमें आपका कोई नुकसान नहीं हो रहा है।

नोट: (आलोक पुराणिक जी का नाम मात्र उदाहरण के लिए दिया गया है)

मुफ्त मिलने वाली चीजें मुफ्त नहीं मिलती

भारत की अजीब बनावट का ही कमाल है कि यहां मुफ्त में मिलने वाली चीजें मुफ्त नहीं मिलती हैं। एफआईआर कराने के लिए पैसे देने पड़ते हैं। कोई जरूरी नहीं कि पैसे देने के बाद भी आपकी एफआईआर लिख ली जाए।

हम आप सभी के साथ ऐसा हुआ होगा। सरकारी काम कराने के लिए आपको बख्शीश देनी होती है। यह बख्शीश नहीं घूस होती है। ब्राइब। पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, राशन कार्ड। आपको अधिकारी से लेकर पुलिस वाले को पैसा देना ही पड़ता है।

सुप्रीम कोर्ट ने कल अपने एक आदेश में कहा है कि राज्य यह सुनिश्चित करे कि लोगों के एफआईआर लिखे जाए। रविवार रात दिलवालों की नगरी दिल्ली में कुछ 40-50 लड़कों की टोली ने उत्पात मचाया, जिसका कोई एफआईआर नहीं लिखा गया। यह है दिल्ली पुलिस, विथ यू, फार यू, आलवेज।

सुप्रीम कोर्ट के जज बीएन अग्रवाल ने अपना अनुभव बताया। कहा मेरी पत्नी और बेटी किसी मामले में पुलिस स्टेशन एफआईआर लिखाने गए थे जिसे लिखने में दो-तीन घंटे का समय लग गया। अगर सुप्रीम कोर्ट के जज साथ ऐसा हो सकता है तो आप अनुमान लगा सकते हैं।

आरटीआई इसका इलाज है। लोग आरटीआई को ही नहीं जानते।

क्या आप भी नही जानते ?

आईडेंटिटी क्राइसिस: राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों से एक मुलाकात

स्कूल में सबको पढ़ाया बताया जाता रहा कि बड़ा सपना देखो, बड़े बनोगे। लेकिन सुनता ही कोई नहीं। मैं सुनता था सो मैंने मेरा सपना नाम से ब्लाग बना लिया और जो मुझसे भी बड़ा सपना देखते थे उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव के लिए नामांकन भर दिया। एक नजर..

वकील, दर्जी, बढ़ई, बीमा एजेंट सब के सब लगे पड़े हैं राष्ट्रपति बनने के लिए। अपनी कमाई का 15 हजार भी उन्होंने नामांकन शुल्क भी भर दिया है। कोई भ्रष्टाचार दूर करने के लिए राष्ट्रपति बनना चाहता है तो कोई अफजल को फांसी देने के लिए।

दिल्ली के एक सज्जन हैं तीन बार स्नातकोत्तर कर चुके हैं। एलएलबी की भी डिग्री है। कांग्रेस और भाजपा दोनों को पूंजीवादी पार्टी मानते हैं। पिछली बार इनका नामांकन वैध नहीं पाया गया था और इस बार भी नामांकन वैध नहीं पाया गया है।

राष्ट्रपति बनने के लिए 84 लोगों ने नामांकन भरा था लेकिन अफसोस 82 लोगों के नामांकन वैध नहीं पाये जाने से रद्द कर दिया गया है। क्या यह सारे लोग सनकी हैं। पता नहीं शायद ऊंचा ख्वाब और अपनी पहचान के लिए तरसते हैं। इनको पहचान चाहिए। आईटेंटिटी क्राइसिस।

आरटीआई से सबकी फटी पड़ी है

बच्चे पिता से क्यों डरते हैं? मुझे इसका सीधा जवाब जो समझ में आता है वो है कि पिता बेटे से कुछ भी प्रश्न कर सकता है। कुछ भी।

पत्रकारों से पुलिस क्यों सहमे रहते हैं? सीधा जवाब पत्रकार पुलिस वालों से सवाल पूछने का हक रखते हैं।

इस सवाल पूछने के हक ने ही आम आदमियों को इतना मजबूत बना दिया है कि इसके कारण प्रधानमंत्री कार्यालय, सुप्रीम कोर्ट और संघ लोक सेवा आयोग जैसे कार्यालय इनसे सहमे हुए हैं। आम आदमी की भाषा में कहूं तो इनकी फटी पड़ी है।

आरटीआई, राइट टू इंफोरमेशन, सूचना का अधिकार। आज मैं एक खबर बना रहा था, यह वाली। इस डाक्टर को आरटीआई की ताकत का अंदाजा तो था लेकिन कुछ हो जाएगा शायद इसका अहसास नहीं था। अहसास हो गया।

आप भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए इसका जरूर इस्तेमाल कर सकते हैं। कर सकते हैं नहीं कीजिए। आपका भारत बदलेगा और जरूर बदलेगा।

सावधान! कापीराइट, पेटेंट और आईपीआर से भूचाल आएगा

लोगों की बौखलाहट बढ़ेगी और यह तब तक बढ़ेगी जब तक इसे समझ नहीं लिया जाएगा। विदेशों में लोग इसके प्रति जागरूक हो रहे हैं या यू कहें हो चुके हैं। लेकिन हम भारतीयों की स्थिति इन मामलों में थोड़ी गंभीर है।

कापीराइट, ट्रेड मार्क, पेटेंट। अगर आपका काम रचानात्मक है, मसलन लिखना, पढ़ाना, पेंटिग, गाना गाना तो फिर आप को इनकी समझ जरूर होनी चाहिए। पता चला कल को आप चिल्ला रहे हैं कि यह मेरा है लेकिन कुछ कर नहीं पाएंगे। मतलब कि कोर्ट में केस हार जाएंगे।

आप लोगों ने सुना ही होगा बासमती चावल, करेला, हल्दी, योग के कई आसन अमेरिका में पेटेंट हो रहे हैं मतलब साफ है इन सब चीजों का कोई अब व्यावसायिक इस्तेमाल नहीं कर पाएगा।

गाने की कापीराइट के बारे में आप जानते हैं या नहीं मुझे नहीं पता लेकिन अगर आप अपने जन्मदिन की पार्टी में घर पर ही 50 लोगों के सामने ‘आई एम ए डिस्को डांसर’ बजा रहे हैं तो एचएमवी वाले आप पर केस कर सकते हैं। यह गाना उन्होंने कापीराइट करा रखी है। कंपनी ने केवल कैसेट, सीडी, डीवीडी आपको अपने सुनने के लिए बेची है ना कि पूरे मोहल्ले को सुनाने को। सो सावधान! जानकारी बढ़ाइये

ज्यादा जानकारी के लिए वीकिपीडिया की यह लिंक देख लीजिए।

बाल मजदूरी: भयावह भविष्य, कुछ चित्र

कुछ दिन पहले मैंने एक पोस्ट लिखी थी, क्या आपने कभी 1098 पर फोन किया है? अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन हर साल के 12 जून को श्रम विरोधी दिवस के रूप मनाती है।

हमारे देश में भी सरकार ने अगस्त 2006 में बाल मजदूरी को गैरकानूनी करार दिया है।

किसी ने कहा है कि किसी देश को बरबाद करना है तो वहां के युवा और बच्चों को बरबाद कर दो। तो यह हमारे देश की भयावह तस्वीर..

यह कार्टून बताता है कि हम ही नहीं चाहते कि बाल मजदूरी हटे वरण हम इससे खुश होते हैं।

 cartton as fact

दो बहनें पापकार्न बनाती और बेचती हुई

child labour sisters 

यह मुंबई के 11 साल के लड़के की तस्वीर है जो 80 रुपये के सामान की चोरी में पकड़ा गया, जिसे पुलिस ने बहुत मारा है।

child theft

अफसोस, क्या होगा इस देश का..।
और अंत में झारखंड से निकलने वाले अखबार प्रभात खबर के हजारीबाग संस्सकरण से ली गई एक क्लीपिंग।

child labour

इन सब के अलावा बीबीसी कि बाल श्रम पर कुछ रिपोर्ट

‘परवीन तू है बड़ी नमकीन’: पाक का एक विवादित गाना

भाई मैंने गाना सुना है, बड़ा मस्त गाना है। लेकिन परवीन को कहना भी अपनी जगह सही है। अबरारुल हक का कहना भी अपनी जगह सही है। खैर बात अब पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट में है। यूट्यूब के इस विडियो में को देख कर भी समझ जाएंगे कि विवाद आखिर कैसे उठा। आपके पास अगर स्पीकर/ईयर फोन हो तो गाना सुनिए और मस्त रहिए।

[youtube=http://www.youtube.com/watch?v=80u8YxVDmQ8]

इसपर बीबीसी की यह रिपोर्ट