आपलोगों को क्या बताऊं, कि ब्लास्ट के बाद क्या-क्या हुआ?

blast

कि एक मृतक परिवार के पिता के आंखों से आंसू नहीं आ रहे
कि मुआवजा लेने के लिए मृतकों को फाइलों में कितनी बार मारा गया
कि राजनेताओं के घर मीटिंग चलेगी, जिसमें आरोप-प्रत्यारोप को लेकर बहस थोड़ी आहिस्ता होगी
कि खून की राजनीति करते नेताओं को शर्म भी नहीं आएगी
कि खून पानी में जा मिला, मानो हमलोग खून और पानी मे विभेद भूल गए हों
कि..
कि..
कि पता ही ना चले कि क्या लिखें….

अरबपति भारत, विश्व की खाद्यान्न समस्या और कोडंलीजा का बयान

इतिहास गवाह है कि भारत को नजरअंदाज कर कभी भी कोई काम नहीं किया जा सकता। धीमे-धीमे ही सही लेकिन भारत और भारतीय अपनी पहचान विश्व के अन्य भूभाग पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराते रहे रहें हैं।

हलिया में पत्रिका फोब्र्स ने कहा कि 2018 तक भारत में सबसे ज्यादा अरबपति होंगे। आम भारतीय इन्हीं बातों से खुश हो लेता है। लेकिन विदेशियों को यह बातें नागवार लगती होंगी! मैं यहां “होंगी” लिख रहा हूं क्योंकि ऐसा मेरा अंदाजा है। कोई ठोस प्रमाण नहीं है मेरे पास।

इस अंदाजे को और बलवती करती है कोंडलीजा राइस का यह बयान कि विश्व में खाद्यान्न समस्या जो उत्पन्न हुआ है, उसका एक मुख्य वजह भारत है। भारत में इन दिनों खाद्यान्न की खपत बढ़ गई है जिसके कारण विश्व के कई हिस्सों में इसकी कमी हो गई है।

विश्व का सबसे अधिक उर्जा खपत करने वाला देश जब विश्व का सबसे अधिक खाद्यान्न उपजाने वाले देश को ऐसा कुछ बोले तो कुछ समझ नहीं आता।

जिस तेल के लिए अमेरिका ने इराक पर हमला किया था, लाखों डालर खर्च कर दिए अब वही तेल अमेरिका के साथ पूरे विश्व को अपनी धार दिखा रहा है। बांग्लादेश, हैती, जिम्बाब्वे, फिलीपींस व मध्य पूर्व अफ्रीका के देशों में खाने की भारी कमी है। राईस इसी का ठीकरा विश्व के दो सबसे विकास करने वाले देशों (भारत और चीन) पर फोड़ देना चाहती हैं।

अर्जेटीना में हाल ही एक किलो टमाटर की कीमत एक किलो गोश्त से ज्यादा हो गई थी। भारत में तो सब्जियों के दाम किलो में बताए ही नहीं जाते। यहां दुकानदार सब्जियों के दाम 250 ग्राम के हिसाब से बताता है।

हर देश की खाद्यान्न जरूरत बढ़ रही है। इसे दूसरे देश के भरोसे रह कर पूरा नहीं किया जा सकता। भारत में तेल नहीं है तो जापान में खाद्यान्न नहीं तो दुबई में पानी नहीं। इन सब की वैकल्पिक व्यवस्था की जिम्मेदारी वहां की सरकार को करनी चाहिए।

संयुक्त राष्ट्र ने खदान संकट से निपटने के लिए टास्क फोर्स का गठन किया है.

कुछ संबंधित लिंक्स

Washington Post : Food Crisis

Sunday Herald : Articles on Food Crisis

Time Magazine: After The Oil Crisis, a Food Crisis?

रोलिंग के हाथों में जादू है

मैंने हैरी पाटर के छह किताबें पढ़ी हैं। पहले की चार हिंदी में बाकी के दो अंग्रेजी में। मेरी अंग्रेजी इतनी अच्छी भी नहीं है लेकिन यह जे के रोलिंग के हाथों का जादू है कि मैं उन किताबों को पढ़ पाया।

जिन्होंने भी हैरी पाटर नहीं पढ़ी है उसके बारे में यही कहा जा सकता है कि वो सारे ‘मगलू’ हैं। अगर आप मगलू नहीं जानते तो पढ़े हैरी पाटर सीरीज।

वैसे आज के दिन क्या हिंदी और क्या अंग्रेजी पूरे विश्व में हैरी पाटर छाया हुआ है। आप मजमून देख लीजिए। हमारे टीवी चैनल जिनको बाबा और सांप से फुरसत नहीं मिलती है आज सुबह वह भी पाटर मानिया से अभिभूत दिखे।

Harry Potter in Wikipedia

JK Rowling official website

शिल्पा शेट्टी को डाक्टरेट और गांधी जी से तुलना

Shilpa shetty

मेरे साथ काम करने वाले मेरे एक वरिष्ठ सहयोगी ने कहा क्या किसी को भी डाक्टरेट दिया जा सकता है? उनका यह सवाल शिल्पा शेट्टी को लंदन की लीड्स विश्वविद्यालय द्वारा डाक्टरेट की मानद उपाधि देने पर था।

मैंने छूटते ही कहा क्यों लंदन में उसने जो लड़ाई लड़ी यह उसका पुरस्कार है। शिल्पा शेट्टी आज लंदन ही नहीं पूरे ब्रिटेन में सबसे चर्चित शख्सियतों में से एक है।

‘बिग ब्रदर’ में ना जाने शिल्पा को क्या-क्या कहा गया और उसने उसका जिस तरीके से सामना किया वह काबिले तारीफ है। साथ ही मैंने कहा अगर शिल्पा ने कोई बड़ा काम नहीं किया है तो फिर गांधी जी भी कोई बड़ा काम नहीं किया है। क्या किया उन्होंने? अपने देश को अंग्रेजों से छुड़वाया। भई अगर अपनी चीज आप किसी से लेते हैं या तो फिर आपने कोई बड़ा काम थोड़े ही किया है।

पहले शिल्पा शेट्टी के बारे में कुछ। उन्हें ‘बिग ब्रदर’ में शामिल होने के लिए 31.5 मीलियन डालर मिले। यह उनका व्यावसायिक डील था। शिल्पा शेट्टी ने प्रोग्राम शुरू होने के बाद चार दिनों तक नहाया नहीं क्योंकि बाथरूम में कैमरा लगा हुआ था। उन्हें अपनी पब्लिशिटी से ज्यादा अपनी संस्कृति की ज्यादा फिक्र थी। या फिर अपनी इज्जत की तो कम से कम थी ही। उसके बाद उन्हें जो कहा गया वह आप इस लिंक में देख सकते हैं।

शिल्पा ने बिग बास के शुरुआत में ही कहा था कि इसमें जीतने के उन्हें शून्य फीसदी आशा है, मेरे लिए सबसे बड़ी चीज होगी अपने सम्मान और संस्कृति को बचा कर रखना।

अब जरा गांधी जी की बात। गांधी जी के पिता करमचंद गांधी पोरबंदर के दीवान थे। बचपन में पढ़ने लिखने में अच्छे ना होने के बावजूद गांधी जी को 18 साल की छोटी आयु में विदेश पढ़ने के लिए भेजा गया। उस समय जब लोग अपने शहर से दूसरे शहर नहीं जा पाते थे। गांधी जी का पहनावा किसी राजकुमार से कम नहीं होता था। लेकिन फिर भी दूसरे देश दक्षिण अफ्रीका में पहले उन्हें सिर से पगड़ी हटाने के लिए कहा गया और बाद में ट्रेन के फ्रस्र्ट क्लास के कोच से धक्का देकर निकाल दिया गया।

मेरे विचार से गांधी जी सौ फीसदी सुधारवादी व्यक्ति थे। जब तक उन्होंने कोट और टाई पहना कोट और टाई की बड़ाई करते रहे। जब उन्होंने धोती पहनना शुरू किया धोती के लाभ गिनाने लगे।

गांधी जी ने भी अपना आत्मसम्मान और संस्कृति नहीं जाने दिया। ठीक वही काम शिल्पा शेट्टी ने लंदन के रियलिटी शो ‘बिग ब्रदर’ में किया।

अमिताभ बच्चन सत्तर के दशक में इसलिए पोपुलर हुए कि उन्होंने ऐसी फिल्मों में अभिनय किया जो आम युवाओं से मिलती थी। परेशान युवा को हर कोई सताने वाला होता था बचाने वाला कोई नहीं। और उन फिल्मों को देख तब का युवा मन अमिताभ को अपने से जोड़ता था।

आज लंदन में रहने वाले भारतीय व एशियाई मूल के लोग भी शिल्पा शेट्टी से अपने को जोड़ कर देख रहे हैं। शिल्पा ने पहले तो यह काम पैसों के लिए जरूर किया लेकिन बाद में प्रोग्राम के दौरान पैसा गौण हो गया। अपना आत्मसम्मान सर्वोच्च हो गया।

हमें लोगों की प्रशंसा हृदय से करनी चाहिए। अगर उसने सच में अच्छा काम किया है तो।

मेरा सच में मानना है कि शिल्पा शेट्टी ने जो काम किया उसका प्रभाव जरूर गांधी जी के द्वारा किए गए दक्षिण अफ्रीका के काम से कम हो लेकिन काम दोनों एक ही है।

सेंसेक्स तेंदुलकर को पीछे छोड़ने पर उतारु

जिस सचिन तेंदुलकर के बारे में कहा जाता रहा कि उसके रिकार्ड की बराबरी करना मुश्किल है उसे अब बंबई स्टाक एक्सचेंज चुनौती दे रहा है।

जी हां यह सच बात है, आखिर आज सेंसेक्स ने 15000 का आंकड़ा छू ही लिया। जब से सचिन ने इस आंकड़े को छुआ है तब से बाजार भी सचिन को पीछे छोड़ने का मन बना चुका है।

भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती से सचिन तो मुश्किल ही मुकाबला ले पाएंगे। अगर बाजार के जानकारों की माने तो अगले दस साल में बाजार अपने वर्तमान के मुकाबले से दुगुना हो जाएगा। सचिन तो काफी पीछे छूट जाएगा। शायद सचिन भी यही चाहते होंगे आखिर इसमें उनका फायदा भी तो है।

आईडेंटिटी क्राइसिस: राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों से एक मुलाकात

स्कूल में सबको पढ़ाया बताया जाता रहा कि बड़ा सपना देखो, बड़े बनोगे। लेकिन सुनता ही कोई नहीं। मैं सुनता था सो मैंने मेरा सपना नाम से ब्लाग बना लिया और जो मुझसे भी बड़ा सपना देखते थे उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव के लिए नामांकन भर दिया। एक नजर..

वकील, दर्जी, बढ़ई, बीमा एजेंट सब के सब लगे पड़े हैं राष्ट्रपति बनने के लिए। अपनी कमाई का 15 हजार भी उन्होंने नामांकन शुल्क भी भर दिया है। कोई भ्रष्टाचार दूर करने के लिए राष्ट्रपति बनना चाहता है तो कोई अफजल को फांसी देने के लिए।

दिल्ली के एक सज्जन हैं तीन बार स्नातकोत्तर कर चुके हैं। एलएलबी की भी डिग्री है। कांग्रेस और भाजपा दोनों को पूंजीवादी पार्टी मानते हैं। पिछली बार इनका नामांकन वैध नहीं पाया गया था और इस बार भी नामांकन वैध नहीं पाया गया है।

राष्ट्रपति बनने के लिए 84 लोगों ने नामांकन भरा था लेकिन अफसोस 82 लोगों के नामांकन वैध नहीं पाये जाने से रद्द कर दिया गया है। क्या यह सारे लोग सनकी हैं। पता नहीं शायद ऊंचा ख्वाब और अपनी पहचान के लिए तरसते हैं। इनको पहचान चाहिए। आईटेंटिटी क्राइसिस।

ये है iPhone का क्रेज

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अमेरिका में कल Apple ने अपने हाट प्रोडक्ट iPhone को लांच कर दिया। पहले दिन ही आई फोन की बिक्री एक लाख से ज्यादा हो गई है।
अगर इससे आप अनुमान नहीं लगा पा रहे हैं तो यह लिंक देख लीजिए शायद कुछ अनुमान लग जाए। गूगल पर कल के दिन में अमेरिका में 100 सबसे ज्यादा हाट सर्च में 40 iPhone के लेकर सर्च किया गया है।

वैसे आई फोन के बारे में लिख रहा हूं तो कुछ मैं भी बता दूं। अभी यह केवल अमेरिका में AT & T सर्विस के लिए मिलेगा। वैसे कुछ लोगों को ने कहना शुरू कर दिया है कि इसकी सबसे तगड़ी प्रतियोगिता iPod से होगी। आई फोन में iPod के फीचर्स inbuilt हैं।

अगर हम भारतवासी इसका ख्वाब देख रहें हैं तो मैं आपकों एक कड़वी सच्चाई बता दूं कि जब अमेरिका वाले इसे फेंकने लगेंगे तब यह भारत में लांच किया जाएगा। 2009 में। मतलब कि भारत को कूड़ों से भर दो।

 Official website: iPhone

सुनीता को मिलेगा ‘भारत रत्न’!

सुनीता के धरती पर उतरते ही जो पहला अवार्ड उन्हें मिला वह है ‘पर्सन आफ द वीक’। एबीसी न्यूज चैनल ने सुनीता को यह अवार्ड देते हुए कहा कि जो महान कार्य सुनीता व उसके साथी अंतरिक्ष यात्रियों ने की है उसके लिए बधाई।

अब बारी है भारत सरकार की। पिछला भारत रत्न मिला था शहनाई के जादूगर उस्ताद बिस्मिल्ला खां। सुनीता विलियम्स का जन्म अमेरिका के ओहायो में हुआ है लेकिन सुनीता को भारत से काफी लगाव है। जब वह छह महीने पहले अंतरिक्ष में जा रही थी उस समय अपने साथ गणोश की एक मूर्ति और समोसे ले गई थीं।

सुनीता के काम ने उनका कद इतना बड़ा तो कर ही दिया है कि भारत सरकार को यह घोषणा करते हुए फक्र महसूस करना चाहिए। सुनीता अमेरिका और भारत से ऊपर उठकर सारे विश्व की है।

इससे पहले भी ऐसा हो चुका है जब अमर्त्य सेन को अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार मिला था तो उन्हें भारत के कोई भी नागरिक सम्मान नहीं मिला था। भारत सरकार ने उन्हें सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाजा था।

सुनीता विलियम्स को लेकर मेरा भी एक अनुभव है, जो मैं यहां बताना चाहूंगा। मैं अपने खाली समय में विकिपीडिया अंग्रेजी के लिए संपादन करता रहता हूं। तो हुआ यूं कि विकिपीडिया की नीति के अनुसार अगर किसी भी व्यक्ति का लेख बनाया जाता है तो उसके नाम उन विभिन्न भाषाओं में लिखे जाते हैं जिससे संबंधित व्यक्ति जुड़ा हुआ है। मसलन शिल्पा शेट्टी के लेख में उनका नाम हिन्दी के अलावा मराठी से भी लिखा जाएगा क्योंकि वह वहां की हैं।

ठीक उसी प्रकार से सुनीता विलियम्स के लेख में मैंने उनका नाम हिंदी से लिख दिया। दूसरे दिन किसी ने उनका हिंदी का नाम हटा दिया। मैंने उस बंदे के पेज पर जाकर पूछा कि आपने क्यों हटा दिया क्योंकि मैंने हिंदी में इसलिए लिखा था चूंकि वह भारतीय मूल की हिंदी है और भारत की राजभाष हिंदी है। कुछ बहस-मुबाहिसों के बाद मेरी जीत हुई और उनका नाम मैंने हिंदी में रहने दिया।

ठीक इसी तरीके की जीत तभी होगी जब हम सब मिलकर कहेंगे कि सुनीता विलियम्स को भारत रत्न मिलना चाहिए।

देख तेरे संसार की हालत क्या हो गई भगवान, कितना बदल गया तापमान

save environment

कल 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाएगा। हम सभी लोगों ने डिस्कवरी चैनल पर पर्यावरण से ना छेड़छाड़ करने के कई तरीके देखे होंगे। लेकिन अमल हम लोगों में से कुछ ने ही किया होगा।

कल दिल्ली में पारा था 44 डिग्री और पुरुलिया में 48डिग्री। किसी ने आफिस में कहा कि हे भगवान इतनी गर्मी मत बढ़ाओ। क्या इसके लिए भगवान जिम्मेदार हैं?

बीते कुछ सालों से एक समस्या ग्लोबल समस्या बन गई है। इसका नाम ही ग्लोबल वार्मिग है। क्योटो में इसे सुलझाने की बात चल रही थी लेकिन यह सुलझी नहीं। बेशक यह और विकराल हो चली है।

इस माल, पित्जा-बर्गर, अपार्टमेंट संस्कृति ने पर्यावरण को घर में लगे मनी प्लांट तक सीमित कर दिया है। लोग अपने लॉन में मिर्च के दो पौधे लगाकर बहुत खुश होते हैं। हमें इनसे आगे सोचना होगा।

इस बार जो पर्यावरण दिवस पर स्लोगन दिया गया है, वह है Melthing Ice, A Hot Topic। हमें ऐसे प्रयास करने होंगे कि आइस मेल्ट ना करने पाए।

राजस्थान का हाल, बड़ा बेहाल, कुछ चित्र…

प्रभावित इलाक़े

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ये है पूर्वी दिल्ली का नजारा

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मीणा समुदाय के लोग मोटर बाइक में

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जयपुर-अजमेर हाइवे

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मीणा समुदाय के लोग, देसी कट्टा दिखाने का मौका

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दिनवार ब्यौरा  

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गुज्जर समुदाय ने ट्रक को जला दिया

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पिछले दिन से राजस्थान जल रह है लेकिन वसुंधरा राजे कि तरफ से कोई बयाँ नही आया है।  मुझे लगता है अपनी कोई मूर्ति बनवा रही होंगीउन्हें अपनी पूजा करवाने का शौक काफी है

बीबीसी हिंदी में जरी पोल के अनुसार

राजस्थान में जारी गूजर समुदाय का संघर्ष:

बढ़ते जातिवाद का प्रतीक है (333 votes)  41.2%

सुविधाएँ पाने की अनुचित कोशिश है (361 votes) 44.7%

दबे-कुचले लोगों की जायज़ माँग है (114 votes) 14.1%

आप क्या कहते हैं ???