अब यह कितना बड़ा खतरा है इसका केवल अंदाजा भर लगाया जा सकता है। लेकिन अंदाजा लगाने का पैमाना क्या हो, इस पर थोड़ी जिरह हो सकती है।

किसी ने कहा है कि किसी देश को बरबाद करना हो तो वहां के युवा वर्ग को बरबाद कर दो देश खुद ब खुद बरबाद हो जाएगा।

बात हो रही है समलैंगिकता की। अमेरिका में ओकलाहोमा सिटी की रिपब्लिकन सैली कर्न ने कहा कि अमेरिका के लिए आतंकवाद और इस्लाम से भी बड़ा खतरा समलैंगिकता है।

क्या यह खतरा है? अगर यह खतरा है तो क्या सचमुच इतना बड़ा खतरा है?

समलैंगिकों को मानना है कि यह एक तरीके की आजादी है। अगर हम आजाद हैं तो हमारी अपनी आजादी भी होनी चाहिए। हम चाहें जिसके साथ चाहें रहें, सरकार को इसमें कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए।

सरकार का कहना है कि यह प्रकृति के खिलाफ इसलिए इसका कोई आधार नहीं है और यह अवैध है।

सरकार और समलैंगिकों की इस लड़ाई के बीच 2001 में सबसे पहले नीदरलैंड ने समलैंगिकों के विवाह को कानूनी मान्यता दी। उसके बाद बेल्जियम, कनाडा, दक्षिण अफ्रीका, और स्पेन ने भी समलैंगिकों के आगे घुटने टेके। अमेरिका में यह लड़ाई 50 राज्यों में लड़ी जा रही है। कई राज्यों में मान्यता मिल चुकी है और कई इस ओर अग्रसर हैं।

भारत में इसका प्रभाव समाज के हर क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। फिल्में बन रही हैं, विश्वविद्यालयों में बहस कराए जा रहे हैं, किताबें लिखी जा रहीं हैं।

अभी तक भारत में इसके आभास भर से दोस्त यार फब्तियां कसते नजर आते हैं। मुझे नहीं पता कि यह इसके होने से भारत का युवा वर्ग कब गर्व करने लगेगा। इसके एहसास से ही एक कंपन सी होती है। मेरी निजी राय के मुताबिक मैं इसका विरोध तो नहीं कर सकता लेकिन इसको प्रोत्साहन कभी नहीं दूंगा।