मेरे घर के चारों खंभे हिलते हैं!!

मैं जिस घर में पैदा हुआ वही मेरा घर हो गया। मेरा घर मुझे बहुत प्यारा लगता है। यह सबके साथ होता है। इसमें नया कुछ भी नहीं है।

इसके आसपास खूब विकास हो रहा है। मेरे घर में भी विकास हो रहा है। अब मेरा घर सुबह-शाम चमकता रहता है। वैसे तो यह घर बहुत पुराना है। काफी पुराना लेकिन मेरे ‘बापू’ को यह 60 साल पहले मिला था। सो मैं या बाहर के लोग भी इसे 60 साल पुराना ही मानते हैं।

इधर मेरे घर में काफी शोर हो रहा है। मैं थोड़ा परेशान हूं और हो जाता हूं। अपने घर वाले ही घर के अंदर ही शोर मचा रहे हैं। मेरे भाई, मेरी बहन। लेकिन फिर भी ‘बापू’ के संस्कारों से घर सही से चल रहा है।

तो मैं कह रहा था कि मेरे घर के चारो खंभे कभी-कभी हिलते हैं। पता नहीं क्यों? वैसे तो मुझे लगता रहता है कि घर की बनावट में सब कुछ ठीक है लेकिन फिर भी कभी-कभी..।

विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका और चौथा प्रेस(यह कभी सबसे मजबूत तो कभी सबसे कमजोर खंभा नजर आता है।)

Indian Parliament

न्यायपालिका रूपी खंभे पर तब थोड़ी कंपन हुई जब कोई आदेश देता है कि गीता को धर्मशास्त्र का दर्जा मिलना चाहिए। मेरे घर का यह सबसे मजबूत खंभा है। अगर इसमें कंपन होती है तो घर में दरकने का खतरा हमेशा बना रहेगा।

विधायिका रूपी खंभा तो कई बार हिला है। तहलका का खुलासा हो, सांसदों के प्रश्न के बदले पैसे मांगने का मामला। जिसे सबसे ज्यादा मजबूत होना चाहिए, वही सबसे ज्यादा कमजोर है। मेरे घर का सबसे ज्यादा बोझ इसे ही वहन करना है।

कार्यपालिका रूपी खंभा को हिलाने के लिए दो-तीन शब्द कहना चाहूंगा। बोफोर्स, झामुमो रिश्वत कांड। इसका काम करने का तरीका थोड़ा ढंका हुआ होता है। हां! आरटीआई के आने से यह जरूर साफ हुआ है।

और अंत में

प्रेस। इसके पास एक कलम है। और आजकल यह कहता फिरता है, पेन इज माइटर दैन शोर्ड। यह दंभी हो रहा है। मेरे पास पावर है। मुझे यह करने की छूट है। मैं यह कर सकता हूं। यह अपना दायित्व भूलता जा रहा है। कैमरे के जरिए अब यह काले काम कर रहा है। अगर यह सशक्त रहा तो मेरा घर हमेशा आबाद रहेगा। इसे अपने दायित्वों को समझना होगा।

मेरे घर के चारो खंभे एक दूसरे के पूरक हैं। इन्हें मिलकर काम करना होगा। तभी हमारा भारत महान हो पाएगा।

भारत, पाकिस्तान, रुपया और अशांति

बात शुरू होती है दो खबर के आने बाद से। खबर है कि पाकिस्तान का नाम सबसे दस अशांत देशों में है। आप लोग कहेंगे इसमें कौन सी बड़ी बात हो गई है। है ही या होगा तभी शामिल हुआ है।

साथ ही दूसरी खबर है कि भारत उन 12 देशों की सूची में शामिल हो गया है जिसकी अर्थव्यवस्था एक खरब डालर के पार हो गई है। आप कहेंगे यह तो होना ही था आखिर इंडिया शाईन जो कर रहा है। सेंसेक्स रोज छलांगें लगाता है। कमल जी क्यों सही कहा ना!!!

अब मैं दोनो खबरों को मिलाता हूं देखते हैं क्या बनता है। भारत अशांत देशों में बहुत पीछे नहीं है। 121 देशों की लिस्ट में भारत का नंबर है 109। इसका यह मतलब हुआ कि यहां रुपया तो बढ़ रहा है लेकिन शांति नहीं बढ़ रही है। इस लिस्ट को बनाने के लिए 24 पैमाने चुने गए थे, जिसमें कुछ मुख्य हैं, भ्रष्टाचार, हिंसा, नियोजित अपराध, सेना के ऊपर खर्च।

यह आंकड़े ग्लोबल पीस इंडेक्स ने जारी किए हैं। ग्लोबल पीस इंडेक्स के वेबसाइट पर जब मैंने देखा तो मदर टेरेसा के एक कथन ने मुझे बरबस यह पोस्ट लिखने को मजबूर कर दिया।

‘अगर हमारे बीच शांति नहीं है तो इसलिए कि हमलोग भूल गए हैं कि हम एक दूसरे से जुड़े हुए हैं।’
- मदर टेरेसा

शायद भारत और पाकिस्तान के साथ भी यही हो रहा है।

जरा याद करो कुर्बानी !!!

सुबह अखबार खोला ।  एक कागज (पंप्लेट) मिलानौएडा में एक कंप्यूटर संस्थान खुला हैकागज में ऊपर लिखा था फ्री  । और नीच लिखा था केवल सेवा चार्ज देय . संस्थान का नामलाल बहादुर शास्त्री कंप्यूटर संस्थान

राजनेतावो के नाम पर ऐसे ही कई संस्थान खुलते हैं और बंद भी हो जाते हैंमूर्तियों के बारे में नही कहूँगा क्योंकि आप बहता समझ सकते हैं कि शांति के दूत कबूतर …..क्या करते हैं !!!

न्द्त्व इंडिया और हिंदुस्तान को छोड़ दे तो किसी भी मीडिया ने संग्राम के १५०वि वर्षगाठ को ताव्व्जो नही दी

अब दूसरी बात । आज ही मेरठ से १८५७ के संग्राम के १५० साल पूरे होने पर होने एक मार्च का आयोजन किया गया । जिसमे देश भर के १०००० युवा भाग ले रहे हैं । ११ तारीख को यह मार्च देल्ही में आकर ख़त्म होगा । यहा राष्ट्रपति कलाम के साथ उप-राष्ट्रपति भैरो सिंह शेखावत, लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी और कॉंग्रेस की अध्यक्षा सोनिया गाँधी युवाओ को संबोधित करेंगी

इस देश के साथ एक बड़ी विडम्बना हैमैंने कई लोगो से सुना है की यार !! जैसा देश भारत है ना वैसा और कोई देश नही हैना ही हो सकता हैयहा की संस्कृति, यहा ke विचार, यहा के लोग, यहा तक की हमारे देश का जो मानचित्र है वो भी सबसे बेहतर हैमैं भी कहा करता थालेकिन अब मुझे ये मानचित्र के बारे में कहना कुछ समझ नही आताखैर ये बाते तो बाद में ….

गंधिगिरी karte मुन्ना ने कहा था की इनको (नेताओ और क्रांतिकारियों) को कही रखना है तो अपने दिल में रखो . उनके नाम पर संस्थान बनाना , मूर्ति का अनावरण करनाये सब होना चाहिऐ ।  और अगर बने तो उनका उसी सम्मान से रख रखाव करना चाहिऐ ।  हमारे देश का इतिहास बड़ा गौरवपूर्ण रहा है ।  हमारे देश के क्रांतिकारियों और नेतावो ने पूरे विश्व को एक नै दिशा दीवो अपनी बहादुरी के लिए जाने जाते हैं, रहेंगेहम देश वाशियो को भी उनकी तरह बहादुर और इमानदार होना चाहिऐक्योंकि जरा याद करो उनकी कुर्बानीमेरे और पूरे चिटठा जगत की ओर से सभी सहीदो को शत-शत नमन

BBC hindi ki report aur kuch rekhachitr

Dandi march aur Bombay bomb blast ki barsi

Dandi March 

In dono ghatnawo ne Bharat ko hila kar rakh diya tha. Ek aajadi ke pahle ki ghatna hai to ek aajadi ke baad ki. Ek ghatna bharat ke hit ke liye ki gai ek ghatna bharat ke ahit ke liye.

12 March 1930 ko Angrejo ke salt tax ke khilaf Gandhi ji ne Sabarmati Ashram se Dandi 24 din tak 240 miles paidal chale aur namak bana kar kanoon ka virodh kiya.

1993 Mumbai bomb blast

12 March 1993 ko aatankvadiyo ne Bombay mein ek ke baad ek 15 dhamake kiye. Jiske baad se pura bharat ab tak dahal raha hai. 257 log maare gaye, 1400 se jyada log ghayal hue.

Dandi march ko hue 77 saal aur Mumbai bomb blast ko hue 14 saal beet chuke hain. Tab ke bharat aur ab ke bharat mein bahut kuch badal chuka hai. Neta badal chuke hain, pehle ke neta bharat ke baare mein sochte the aur ab ke neta apne baare mein sochte hain.

Phir bhi bharat bahut badla hai. Sabhi log kuch na kuch dekh rahe hain. Sab ka apna apna matlab hai. Kisan apne ko dekhne ke baad neta ko dekh rahe hain. Kaamgaar sarkaar ki nitiyo ko dekh raha hai. Neta kewal apne aap ko dekh rahe hain. Videshi India ki economy ko dekh raha hai. Kyonki India shine kar raha hai.

Everyone is calling India!! India!! India!!

|