कुछ स्टीरियोटाईप सोच: अंतिम भाग

पिछली पोस्ट में बेंगाणी जी ने कहा कि यह अपवाद हैं। उनके इस बात पर केवल इतना कहूंगा कि अपवाद उनके दिमाग में हैं। या अगर वह किस्मत को मानते हैं तो किस्मत के खोटे हैं, जिन्हें ऐसे लोग नहीं मिले। मैं किस्मत को नहीं मानता, कर्म को मानता हूं। मुझे ऐसे लोग मिले हैं।

खर, बात आगे बढ़ायी जाए।

चैत्र महीना में जेठ जैसी गर्मी पड़ रही थी। बाइक पर चलता हुआ मनोरंजन पूर्वी दिल्ली के विकास मार्ग पर 50 की स्पीड से गाड़ी चला रहा था। और तभी उसकी बाईक हुडुक हुडुक के साथ हिचकोले खाई। उसे पता चल गया पेट्रोल खत्म होने वाला है। मुश्किल से अब वह और एक किलोमीटर गाड़ी से जा सकता था। एक्सीलेरेटर पर उसका पंजा थोड़ा और तेज हुआ। लेकिन गाड़ी बंद हो गई थी। एक्सीलेरेटर ने आपना काम करना बंद कर दिया था। थोड़े देर बाद ही गाड़ी ने अपनी गति भी खो दी। मनोरंजन गाड़ी में बैठे हुए ही अपने पैर से धक्का दे गाड़ी को आगे बढ़ा रहा था। तभी पीछे से एक वर्दीधारी ने बाइक में चलते हुए अपने बाएं पैर से मनोरंजन की बाइक को धक्का देना शुरू किया। उसने बिना कहे पेट्रोल पंप तक उसकी गाड़ी को धक्का दिया।

मनोरंजन को सहज यह एहसास नहीं हो रहा था कि एक पुलिस वाले ने ऐसा किया। कई बार सड़क पर अपनी गाड़ी को धक्का दे रहे लोगों के पास से तो मनोरंजन भी गुजरा था। लेकिन उसने यह जहमत कभी नहीं उठाई थी।

पुलिस भी अच्छा सोचते हैं और हमारी आपकी तरह खराब और अच्छे भी हो सकते है।

लाल बहादुर शास्त्री ने एक रेल दुघर्टना के बाद इसकी जिम्मेदारी लेते हुए अपना इस्तीफा सौंप दिया था। फिर एक और जमाना आया जब टाइम्स आफ इंडिया के आर के नारायणण ने एक काटरून में तत्कालीन दूरसंचार मंत्री के बारे में काटरून बनाया। सुखराम अपने आफिस में बैठे हुए थे। चारों तरफ रुपये बिखरा हुआ था। अलमारी में, टेबल पर, फर्श पर, फाइलों के उपर-नीचे, हर जगह। सुखराम अपनी सीट में बैठे हुए कहते हैं, अरे कोई है जो मुझे एक सफेद प्लेन कागज दे, जिससे मैं यह बता सकूं कि मैं निदरेष हूं। झारखंड के रामगढ़ जिला के एक स्थानीय नेता ने एक लड़के को पढ़ाने का पूरा जिम्मा लिया हुआ है।

नेता ईमानदार भी होते हैं और भ्रष्ट भी।

महिलाएं बोलती हैं ठीक उसी तरीके से जैसे मर्द बोलते हैं ज्यादा।

मुझे किसी आजकल के लड़के ने कहा कि आजकल की लड़कियां मोबाइल पर बात ही करती रहती हैं। जब देखो मोबाइल। मैंने उससे कहा क्या बता सकते हो किससे बात करती हैं, उसने कहा लड़के से। मैंने कहा फिर तो आजकल के लड़के भी जब देखो मोबाइल पर ही बात करते रहते होंगे।

यह सब हमारे आपके कुछ स्टीरियोटाइप सोच हैं। इसी स्टीरियोटाईप से बाहर निकलिए। किसी पूर्वाग्रह में हो कर चीजों को मत देखिए।

मान गया लड़कियों को..

हजारीबाग की जिला मजिस्ट्रेट हैं हिमानी पांडे। हिमानी पांडे हिंदुस्तान की संपादक मृणाल पांडे की पुत्री हैं। हिमानी पांडे के बारे में मैं कुछ जांच पड़ताल कर रहा था। तो मुझे एक वेबसाइट दिखी, और उसमें जो देखा वो कुछ नया नहीं था लेकिन फिर भी..।

हिमानी पांडे दिल्ली विश्वविद्यालय से वर्तमान में बीए अंग्रेजी(प्रतिष्ठा) कर रही हैं। अब यह वही हिमानी पांडे हैं या नहीं यह तो मैं नहीं जानता लेकिन.. इससे मेरे निष्कर्ष पर कोई असर नहीं पड़ेगा। हिमानी को 400 में 258 अंक मिले हैं। इससे ज्यादा जिनको भी नंबर आया है सभी लड़कियां हैं। केवल स्टीफेंस कालेज के प्रणव प्रकाश ही एकमात्र छात्र हैं जिन्हें ज्यादा अंक मिला है।

कहीं का रिजल्ट निकले लड़कियां ही आगे होती हैं। मान गया लड़कियों को..।

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