अगर चित्र कुछ बोलती है तो यह भी कुछ बोल रही है की जमाना बदल गया है

IPC section 489Aयह चित्र किस बारे में है यह समझ गए होंगे जो नही समझ पा रहे हैं वो माउस को फोटो के ऊपर ले जाए फोटो का जिस नाम से सेव किया गया है या एड्रेस बार में इसको देखे. इसके बारे में जानने की कोशिश करे. बड़ा भयावह है यह कानून जब इसका ग़लत उपयोग होता है.

यह चित्र पूर्वी दिल्ली के यमुना पुल को पार करने के बाद शकरपुर की पुलिस चौकी के सामने से लिया गया.

पति होने के क्या मतलब हैं?

कहीं से कोई बात निकली और मेरी एक शादी शुदा महिला मित्र ने कहा जब शादी हो तो अपनी होने वाली बीवी से पूछ लेना। मैंने पूछा क्या..? जवाब में रूप में मौन और खामोशी मिला।

मैंने कहा क्या वह मुझसे शादी के बाद काफी मांग करेगी। हो सकता है.. उसका जवाब। मैंने कहा कोई बात नहीं। और उसके बाद दोनों की खामोशी और बात नहीं बढ़ी लेकिन मैं कुछ सोचने लगा..।

किसी का पति होने के क्या मतलब हैं? सबसे पहले तो मैं समझता हूं कि यही एक रिश्ता है जो हमलोग इस धरती पर अपने हिसाब से बनाते हैं। एक मात्र रिश्ता। बाकी के सारे रिश्ते बने बनाए होते हैं। आपने जन्म लिया इसके साथ ही कोई आपका पिता तो कोई आपकी मां। भाई, बहन, चाचा, बुआ, मौसा..आदि। सारे के सारे रिश्तों में आप कुछ नहीं कर सकते हैं। यह सब डिफाल्ट मेड होते हैं। डिफाल्ट कहने का मतलब पहले से बने बनाए।

लड़की अपना सारा घर द्वार छोड़कर पति के घर आती है। इसका मतलब कि ब्याही लड़की का पूरा का पूरा दायित्व पति पर होता है। वह उस घर में पति के साथ आती है। पति की पूरी जिम्मेवारी होनी चाहिए कि वह अपनी पत्नी का सौ फीसदी ख्याल रखे। इसका कतई मतलब नहीं है कि वह जोरू का गुलाम बन जाए लेकिन वह अपनी पत्नी को वह सब कुछ दे जो उसे उसके मां-पिता के घर में मिलता था। तभी आप बन पाएंगे एक सफल पति।

(नोट: मैं कुंवारा हूं। अगले दो-तीन साल तक शादी नहीं करूंगा। इसको पढ़ कर कोई मुझे प्रपोज ना करे।)

घर से बहुत दूर हूं, किसी चीज की कमी खली है

दिल्ली में रहते हुए पांच साल से अधिक हो गए। पिछले दो सालों से अकेले रह रहा हूं। उस पर से यह भाव विहीन शहर। मेरा पड़ोसी मेरा नाम नहीं जानता। हां, काम जानता है। वह भी मुझे लगता है कि पत्रकारिता के ग्लैमर के कारण। किसी बैंक में मैनेजर होता तो शायद ही जान पाता।

ना कोई संवाद, ना कोई विवाद। दफ्तर आना और चुपचाप अपने कमरे में चले जाना। किताबें पढ़ना, टीवी देखना। मेरे कमरे में मेरे दोस्त भी नहीं आते। अगर हमें मिलना होता है तो वह मुझे अपने यहां बुला लेते हैं।

मेरे कमरे से नजदीक नोएडा का सेक्टर 18 पड़ता है जहां हम दोस्त कभी-कभार मिल लेते हैं।

खैर जिसकी कमी खली उसके बारे में बात करूं। घर में तीन भाई-बहनों में सबसे छोटा होने के कारण मुझे थोड़ा ज्यादा ही प्यार मिला है। कल दीदी ने फोन किया तो बताया कि हम लोग फुलोरी खा रहे हैं। तो मैंने कहा यहां तो मैंने एक भी जिनोर नहीं खाया है, तो फुलोरी कहां से मिलेगा?

* फुलौरी: मक्के को पीस कर बनाया जाने वाला मीठा खाद्य पदार्थ
* जिनोर: मक्का, भुट्टा

तो भई यह मेरी पीड़ा। दिल्ली में रिश्तेदारों की बात की जाए तो मेरे एक मौसेरे भाई रहते हैं। भाभी इटावा की हैं। उन्हें फुलौरी के बारे में नहीं पता। उन्हें पता है, चिल्ला, मंगौड़े और पता नहीं क्या-क्या। जो मुझे नहीं पता था।

क्या आप लोगों को इस बारे में कुछ पता है? अगर नहीं पता तो इस लिंक को देखें। इसमें से प्याज, धनिया, नमक वाला आइटम हटा कर केवल चीनी डाल दीजिए फुलौरी तैयार हो जाएगा।

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