बीजिंग ओलंपिक में भारत का अर्जुन, अभिनव बिंद्रा

खबर सुनते ही मेरा सीना चौड़ा होता गया। एक खुशी का एहसास हो रहा है। खबर आने के पांच मिनट के अंदर भारतीय विकिपिडिया यूजर अभिनव बिंद्रा को गोल्ड मेडल दे चुके थे। मेरी खुशी और बढ़ गई। अर्जुन के देश में ओलंपिक इतिहास का पहला व्यक्तिगत गोल्ड अभिनव बिंद्रा ने दिलाया।

खबर देने वाले मीडिया मैन से लेकर आम इंसान तक गूगल में अभिनव को सर्च करने लगा। कुछ औपचारिक बधाई और साधुवाद मिलने लगे। क्रिकेट के देश में अचानक शूटिंग की चर्चा होने लगी। लोगों ने भारत-श्रीलंका टेस्ट से निकलकर न्यूज चैनल और डीडी स्पोर्टस देखना शुरू कर दिया। यूट्यूब पर अभिनव को गोल्ड मेडल दिया जाने वाला क्षण अपलोड कर दिया गया। भारत पदक तालिका में आ गया। एक साथ कई चीजें होने लगी।

फिलहाल पूरा देश खुश है, मैं खुश हूं, आप खुश है। सभी भारत वासियों की ओर से अभिनव बिंद्रा को ढेरों बधाई।

आईएएस और आईएएस का मक्का मुखर्जी नगर-अंतिम भाग

आज जब मैं इसे लिख रहा हूं तो मुमकिन है कि कई लोगों का दिल बैठा जा रहा होगा। आज आईएएस के प्री का रिजल्ट आने वाला है। दिल बैठने वालों की संख्या ज्यादा होती है। इसके बरक्श जिनकी बल्लियां उछलेंगी उनकी संख्या कम होती है।

1997 में लगभग 13 लाख लोगों ने आईएएस बनने के लिए फार्म भरे थे। वह एक रिकार्ड है। इस साल लगभग एक लाख लोगों ने फार्म भरा था। इस साल से यूपीएसी ने प्री में निगेटिव मार्किग शुरू की है। दर्द देने वाला निर्णय है।

आज की शाम हर रोज की शाम की तरह नहीं होगी। बत्तरा पर भीड़ नहीं के बराबर होगी। जो आज क्वालिफाई करेंगे वो ठेके के बाद सीधे कमरे पर जाएंगे। और जो नहीं क्वालिफाई करेंगे उनके लिए भी कुछ ऐसा ही होगा।

सितंबर और अक्टूबर में त्योहारों का मौसम होता है। इस त्योहारों के मौसम में मेंस देने वाले अपना पसीना बहा रहे होते हैं। यही एक समय होता है जब इनकी दोस्ती दोस्तों से कम किसी ऐसे चीज से ज्यादा होती है जो इन्हें सोने ना दे। सिगरेट, चाय, तंबाकू, गुटखा यह कुछ भी हो सकता है।

मेंस देने वाले हर तीन में से एक को साक्षात्कार के लिए चुना जाता है। साक्षात्कार का समय भी होली के ठीक बाद का होता है। इसका साफ-साफ मतलब है कि साक्षात्कार तक जाने वाले विद्यार्थी त्योहारों का मजा नहीं ले पाते। साक्षात्कार में भी हर तीन में से एक को उस पद के लिए चुना जाता है जिसके लिए वह इतनी मेहनत कर रहा होता है।

चुने जाने के बाद भी कई अफसोस करते होते हैं। मैं आईएएस नहीं बन पाया। ये जोनल पोस्ट आफिस का हेड होना भी कोई नौकरी है। सभी की उम्मीदें आईएएस, आईपीएस, आईएफएस बनने की होती है। लेकिन वो बड़ा मशहूर शेर याद आ रहा है-

बनाने वाले तूने कोई कमी नहीं की
अब किसे क्या मिला, यह तो मुकद्दर की बात है॥

सुनीता को मिलेगा ‘भारत रत्न’!

सुनीता के धरती पर उतरते ही जो पहला अवार्ड उन्हें मिला वह है ‘पर्सन आफ द वीक’। एबीसी न्यूज चैनल ने सुनीता को यह अवार्ड देते हुए कहा कि जो महान कार्य सुनीता व उसके साथी अंतरिक्ष यात्रियों ने की है उसके लिए बधाई।

अब बारी है भारत सरकार की। पिछला भारत रत्न मिला था शहनाई के जादूगर उस्ताद बिस्मिल्ला खां। सुनीता विलियम्स का जन्म अमेरिका के ओहायो में हुआ है लेकिन सुनीता को भारत से काफी लगाव है। जब वह छह महीने पहले अंतरिक्ष में जा रही थी उस समय अपने साथ गणोश की एक मूर्ति और समोसे ले गई थीं।

सुनीता के काम ने उनका कद इतना बड़ा तो कर ही दिया है कि भारत सरकार को यह घोषणा करते हुए फक्र महसूस करना चाहिए। सुनीता अमेरिका और भारत से ऊपर उठकर सारे विश्व की है।

इससे पहले भी ऐसा हो चुका है जब अमर्त्य सेन को अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार मिला था तो उन्हें भारत के कोई भी नागरिक सम्मान नहीं मिला था। भारत सरकार ने उन्हें सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाजा था।

सुनीता विलियम्स को लेकर मेरा भी एक अनुभव है, जो मैं यहां बताना चाहूंगा। मैं अपने खाली समय में विकिपीडिया अंग्रेजी के लिए संपादन करता रहता हूं। तो हुआ यूं कि विकिपीडिया की नीति के अनुसार अगर किसी भी व्यक्ति का लेख बनाया जाता है तो उसके नाम उन विभिन्न भाषाओं में लिखे जाते हैं जिससे संबंधित व्यक्ति जुड़ा हुआ है। मसलन शिल्पा शेट्टी के लेख में उनका नाम हिन्दी के अलावा मराठी से भी लिखा जाएगा क्योंकि वह वहां की हैं।

ठीक उसी प्रकार से सुनीता विलियम्स के लेख में मैंने उनका नाम हिंदी से लिख दिया। दूसरे दिन किसी ने उनका हिंदी का नाम हटा दिया। मैंने उस बंदे के पेज पर जाकर पूछा कि आपने क्यों हटा दिया क्योंकि मैंने हिंदी में इसलिए लिखा था चूंकि वह भारतीय मूल की हिंदी है और भारत की राजभाष हिंदी है। कुछ बहस-मुबाहिसों के बाद मेरी जीत हुई और उनका नाम मैंने हिंदी में रहने दिया।

ठीक इसी तरीके की जीत तभी होगी जब हम सब मिलकर कहेंगे कि सुनीता विलियम्स को भारत रत्न मिलना चाहिए।

देख तेरे संसार की हालत क्या हो गई भगवान, कितना बदल गया तापमान

save environment

कल 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाएगा। हम सभी लोगों ने डिस्कवरी चैनल पर पर्यावरण से ना छेड़छाड़ करने के कई तरीके देखे होंगे। लेकिन अमल हम लोगों में से कुछ ने ही किया होगा।

कल दिल्ली में पारा था 44 डिग्री और पुरुलिया में 48डिग्री। किसी ने आफिस में कहा कि हे भगवान इतनी गर्मी मत बढ़ाओ। क्या इसके लिए भगवान जिम्मेदार हैं?

बीते कुछ सालों से एक समस्या ग्लोबल समस्या बन गई है। इसका नाम ही ग्लोबल वार्मिग है। क्योटो में इसे सुलझाने की बात चल रही थी लेकिन यह सुलझी नहीं। बेशक यह और विकराल हो चली है।

इस माल, पित्जा-बर्गर, अपार्टमेंट संस्कृति ने पर्यावरण को घर में लगे मनी प्लांट तक सीमित कर दिया है। लोग अपने लॉन में मिर्च के दो पौधे लगाकर बहुत खुश होते हैं। हमें इनसे आगे सोचना होगा।

इस बार जो पर्यावरण दिवस पर स्लोगन दिया गया है, वह है Melthing Ice, A Hot Topic। हमें ऐसे प्रयास करने होंगे कि आइस मेल्ट ना करने पाए।

राजस्थान का हाल, बड़ा बेहाल, कुछ चित्र…

प्रभावित इलाक़े

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ये है पूर्वी दिल्ली का नजारा

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मीणा समुदाय के लोग मोटर बाइक में

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जयपुर-अजमेर हाइवे

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मीणा समुदाय के लोग, देसी कट्टा दिखाने का मौका

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दिनवार ब्यौरा  

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गुज्जर समुदाय ने ट्रक को जला दिया

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पिछले दिन से राजस्थान जल रह है लेकिन वसुंधरा राजे कि तरफ से कोई बयाँ नही आया है।  मुझे लगता है अपनी कोई मूर्ति बनवा रही होंगीउन्हें अपनी पूजा करवाने का शौक काफी है

बीबीसी हिंदी में जरी पोल के अनुसार

राजस्थान में जारी गूजर समुदाय का संघर्ष:

बढ़ते जातिवाद का प्रतीक है (333 votes)  41.2%

सुविधाएँ पाने की अनुचित कोशिश है (361 votes) 44.7%

दबे-कुचले लोगों की जायज़ माँग है (114 votes) 14.1%

आप क्या कहते हैं ???

खरगोश और कछुआ की कहानी: संप्रग के तीन साल पूरे

UPA GOV 3 years completed 

क्या मजेदार काटरून है। सही बनाया है राजेंद्र जी ने। राजनीति और अर्थशास्त्र दोनों साथ में बंधे हुए हैं..यह तो बड़ी विडंबना है। मैंने इन दो दिनों में चाटुकार पत्रकारिता की कुछ मिसाल देखी हैं। संप्रग के तीन साल पूरे होने पर विभिन्न अखबारों ने अलग-अलग हेडिंग लगाई थी। अगर आपके पास कुछ अखबार हो तो देख लें..। आपको भी पता चला जाएगा। और फिर भी ना समझ आए तो उनके संपादकीय पृष्ठ को जरा पढ़ लें।

मायावती: कुछ तस्वीरे, कुछ कह रही हैं…

बदले बदले से सरकार नजर आते हैं …..इनके तो बर्बादी के आसार नजर आते हैं

Mulayam in oath ceremony

मायावती का माँ प्रेमMaya mummy

अपने आंखो से पट्टिया हटाओहाथी नही… “बहुत बड़ाहाथी है

Cartoon

मायादेवी

Maya power

और साथ ही आज के कुछ अखबारो के शीर्षकअमर उजाला : छक्के पे छक्का

जनसत्ता: मुख्यमंत्री बनते ही माया ने दिखाए तेवर

दैनिक जागरण: सीएम बनते ही फार्म में दिखी मायावती

राष्ट्रीय सहारा: चुनाव घोषणा बाद के सभी फैसले रद्द

Hindusatan Times: UP bureaucrats realise Maya is memsahib

Times of India: Maya in saddle, goes after SP

क्या कल अमिताभ बच्चन का भी दिमाग गरम होगा?

रात के एक बज चुके हैंमैं जग रहा हूमैं अपने पेशे के कारण जग रह हू ।  और उत्तर प्रदेश के कई नेता …. ? वो भी जग रहे होंगेसच कहू तो उन्हें नींद नही रही होगीसुबह सात बजे से counting जो होनी हैनेताओ के अपने गुना भाग चल रहे होंगेआने वाले कुछ और दिन तक अभी और चलेंगेसपा, बसपा और भाजपाकॉंग्रेस तो लडाई में कही है ही नहीनेता गन हर दाव खेलने के लिए तैयार हैंसाम, दाम, दण्ड, भेदकुरशी कही नही जानी चाहिऐजेठ कि इस दुपहरी क्या नेता, क्या जनता सभी का दिमाग गरम हो जाएगाहारने वाले का तो पूछिये मत !!!

इन अब के बीच सपा के महासचिव श्री अमर सिंह जी के बडे भैया श्री अमिताभ बच्चन जी का भी दिमाग तो कही नही गरम रहेगा ? अगर घर में माहौल गरम रहेगा तो घर के बडे भैया का मूड भी हो सकता है …… ये एक सम्भावना हैन्यूज़ चैनल वालो के एग्जिट पोल से ही घर में गरमी का माहौल है

सपा को सबने कम ही दिखाया हैकोई कहता है 119 सीट आएगी तो कोई 106 । ये स्टार वाले तो केवल 96 कहते हैंकुछ तो ख़याल किया होताअरे श्री अमर सिंह जी का ना सही कम से कम श्री अमिताभ बच्चन जी के सेहत का ख़याल तो किया होतामेरा दिल तो सोच-सोच कर बैठा जाता हैअब कोई कर भी क्या सकता है!!!

जरा याद करो कुर्बानी !!!

सुबह अखबार खोला ।  एक कागज (पंप्लेट) मिलानौएडा में एक कंप्यूटर संस्थान खुला हैकागज में ऊपर लिखा था फ्री  । और नीच लिखा था केवल सेवा चार्ज देय . संस्थान का नामलाल बहादुर शास्त्री कंप्यूटर संस्थान

राजनेतावो के नाम पर ऐसे ही कई संस्थान खुलते हैं और बंद भी हो जाते हैंमूर्तियों के बारे में नही कहूँगा क्योंकि आप बहता समझ सकते हैं कि शांति के दूत कबूतर …..क्या करते हैं !!!

न्द्त्व इंडिया और हिंदुस्तान को छोड़ दे तो किसी भी मीडिया ने संग्राम के १५०वि वर्षगाठ को ताव्व्जो नही दी

अब दूसरी बात । आज ही मेरठ से १८५७ के संग्राम के १५० साल पूरे होने पर होने एक मार्च का आयोजन किया गया । जिसमे देश भर के १०००० युवा भाग ले रहे हैं । ११ तारीख को यह मार्च देल्ही में आकर ख़त्म होगा । यहा राष्ट्रपति कलाम के साथ उप-राष्ट्रपति भैरो सिंह शेखावत, लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी और कॉंग्रेस की अध्यक्षा सोनिया गाँधी युवाओ को संबोधित करेंगी

इस देश के साथ एक बड़ी विडम्बना हैमैंने कई लोगो से सुना है की यार !! जैसा देश भारत है ना वैसा और कोई देश नही हैना ही हो सकता हैयहा की संस्कृति, यहा ke विचार, यहा के लोग, यहा तक की हमारे देश का जो मानचित्र है वो भी सबसे बेहतर हैमैं भी कहा करता थालेकिन अब मुझे ये मानचित्र के बारे में कहना कुछ समझ नही आताखैर ये बाते तो बाद में ….

गंधिगिरी karte मुन्ना ने कहा था की इनको (नेताओ और क्रांतिकारियों) को कही रखना है तो अपने दिल में रखो . उनके नाम पर संस्थान बनाना , मूर्ति का अनावरण करनाये सब होना चाहिऐ ।  और अगर बने तो उनका उसी सम्मान से रख रखाव करना चाहिऐ ।  हमारे देश का इतिहास बड़ा गौरवपूर्ण रहा है ।  हमारे देश के क्रांतिकारियों और नेतावो ने पूरे विश्व को एक नै दिशा दीवो अपनी बहादुरी के लिए जाने जाते हैं, रहेंगेहम देश वाशियो को भी उनकी तरह बहादुर और इमानदार होना चाहिऐक्योंकि जरा याद करो उनकी कुर्बानीमेरे और पूरे चिटठा जगत की ओर से सभी सहीदो को शत-शत नमन

BBC hindi ki report aur kuch rekhachitr

अब तेरा क्या होगा बुश !!

Time Cover

शोले फिल्म का बड़ा मशहूर डायलोग है : अब तेरा क्या होगा रे कालिया !!  टाइम मैग्जीन ने इस साल 100 प्रभावशाली लोगो कि सूची जारी कर बुश पर लगभग यही डायलोग फीट करवा दियावैसे ध्यान देने वाली बात है की बुश प्रशाशन की ही कोंडोलीसा राईस का नाम लगातार चौथी बार इसमे शामिल है

इराक युद्घ में घर से लेकर बाहर तक अपनी बदनामी करवा चुके जॉर्ज बुश ऐसे कई छोटे बडे लिस्ट ठेंगा दिखा रहे हैं

ये लिस्ट टाइम मैग्जीन पूरे विश्व भर के 100 प्रभावशाली लोगो के लिए होता हैइस लिस्ट में अमेरिका का दुश्मननंबर वन अल कायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन भी शामिल हैशावेज बुश को अमेरिकी धरती पर ही सबसे बड़ा शैतान कह देते हैं ।  जब मैंने टाइम की आधिकारिक वेबसाइट देखी तो वहा पर कई लोगो ने इसपर कमेंट दिया है की कही पत्रिका एंटी बुश एजेंडा तो नही चला रहा है । लोगो ने तो टिम के निस्पक्षता पर ही सवाल उठा दिए हैंएक पाठक लिखता है की अब मैं टाइम मैग्जीन नही खरीदूंगा । 

एक ने लिखा है की मेरे राष्ट्रपति चाहे जैसे भी हो उन्हें फ़ाइनल १०० में जरूर होना चाहिएबुश को लेकर लोगो ने अपनी खूब सारे कमेंट लिखे हैंकई को पढने के बाद मुझे ये लग रहा है की कही अमेरिकी लोग भावनावो में तो सारे कमेंट नही लिख रहे हैं

आज एक खबर आई है की ईरानी मिसाईल अगले 8 सालो में अमेरिका को अपनी ज़द में ले लेंगेदैनिक जागरण की रिपोर्ट

मेरी अपनी राय तो यही कहती है की बुश के दिन लद जरूर रहे हैं लेकिन स्थिति इतनी बुरी नही है की उन्हें अन्तिम १०० में जगह ना मिलेखैर ये तो वक़्त (TIME) की मर्जी है

इस लिस्ट में भारत की सोनिया गाँधी, लक्ष्मी मित्तल और इंदिरा नूयी शामिल है