सोसियोलोजी की पढ़ाई शुरू..

काल सेंटर में काम करने वाले युवक ने आत्महत्या की.. समाज बदल रहा है। 14 साल की आरुषि की हत्या होती है.. समाज पर इसका असर गहरा होगा! अंतरजातीय शादियां हो रही हैं.. कुछ का मानना है कि समाज सुदृढ़ होगा तो कुछ इसके ठीक उलट समाज व्यव्यस्था को टूटता हुआ देख रहे हैं।

समाज के ढांचा और उसमें होने वाले बदलावों को बताने वाला विषय समाजशास्त्र। स्नातक किए हुए पांच साल हो गए। स्नातकोत्तर करने की सोचता था। हिंदी में थोड़ी रूचि थी, सोचा था हिंदी लूंगा। लेकिन इच्छा बदली और समाज को जानने की लालसा ने समाजशास्त्र की ओर ध्यान खींचा। .. और मैंने इग्नू से स्नातकोत्तर में समाजशास्त्र ले लिया।

कई रेग्यूलर पढ़ाए जाने विषयों में समाजशास्त्र सबसे नया विषय है। इसका इतिहास महज 150 से 200 साल की है। नया और मजेदार विषय है। फिलहाल मैं इसको विकिपिडिया में पढ़ रहा हूं। आगे जैसे-जैसे इससे जुड़ी कुछ रोचक घटनाएं होंगी तो सहज रूप से यह ब्लाग पर जरूर आएंगी।
तब तक के लिए..

नया और नवीन..
शाखाएं अच्छी लगती हैं
लेकिन पुराना जड़..
इसकी पहचान होती है
.. इसलिए पुराने को ना भूलना।

किताबें, जिनसे मैंने बहुत कुछ सीखा

मेरा ऐसा मानना है कि शिक्षा अकेली ऐसी चीज है, जो किसी की प्रकृति को बदल सकती है। चाहे फिर वो किताबों से मिले या किसी की निजी जिंदगी से।

विचारों की उड़ान हो या कल्पनाशीलता की भव्यता, जाति और धर्म को लेकर समझ को बनाने में इन किताबों ने खासा महत्वपूर्ण योगदान दिया। इन किताबों से चीजों को देखने का नजरिया बदला है।

मेरी भी प्रकृति बदली है, जिसमें कुछ किताबों का खास योगदान है।

संस्कृति के चार अध्याय -रामधारी सिंह दिनकर

द अल्केमिस्ट -पावलो कोहेलो

फ्रीडम एट मीड नाईट - डामिनिक लैपियर और लैरी कोलिंस

टोपी शुक्ला -डा राही मासूम रजा

कितने पाकिस्तान -कमलेश्वर

टोबो टेक सिंह -सहाअदत हसन मंटो

रहीम के दोहे

हैरी पाटर सीरिज -जे के रोलिंग

प्रेमचंद की कहानियां

साथ ही कई और लेख, अखबार की कतरने, पत्रिकाएं आदि।

क्या पढ़ना चाहिए से ज्यादा जरूरी जानना है कि क्या नहीं पढ़ना है। यह मैंने अपने स्कूल के दौरान सीखा था लेकिन अब पत्रकारिता में आकर लगता है नहीं सब कुछ पढ़ना चाहिए लेकिन आपमें अच्छे और बुरे को अलग करने का गुण जरूर होना चाहिए।

हम अपनी आदतें बनाते हैं

हम अपने भविष्य को नहीं बनाते, हम अपनी आदतें बनाते हैं और हमारी आदतें ही हमारा भविष्य बनाती हैं- विष्णु कच्छप

देश के नवीनतम राज्य झारखंड के जमशेदपुर में रहने वाले विष्णु ने जेपीएससी की सिविल सेवा की परीक्षा में तीसरे स्थान रहे।

विष्णु की यह उपलब्धि इस मायने में खास है कि वह एक अत्यंत निर्धन परिवार से हैं। विष्णु सात भाई बहनों में सबसे बड़े हैं और शादी शुदा है। यह सारी परिस्थितियां अपने लक्ष्य को पाने के लिए प्रतिकूल हैं लेकिन विष्णु ने अपने साहस से इसे अनुकूल करते हुए इसे पूरा कर दिया पूरी खबर के लिए इसे पढ़े।

खबर सौजन्य: हिन्दुस्तान

                                                         Jpsc boy Vishnu kaschap 

राम का नाम यानि उम्र 40 से ऊपर

यह भी मजेदार है। आपका नाम भी आपके बारे में सबकुछ नहीं तो बहुत कुछ बता जाता है। अगर ना मिले तो अपवाद माना जा सकता है।

नाम के आगे राम लगा है तो उम्र तो 40 पार होगी ही। नाम में नाथ लगा है तो 50 पार। कुछ नाम तो ऐसे हैं कि अगर हजार लोगों की भीड़ है और आप पत्थर फेंक दें तो पत्थर उसी नाम वालों में से किसी एक का सर फोड़ देगी। रवि, सुनील, दीपक, सुमन, मीना, सीमा.. ऐसे ही कुछ नाम हैं। इसकी संख्या आप भी बढ़ा सकते हैं।

क्या कहा.. प्रत्युश। मुमकिन है लड़का दस साल से छोटा होगा। अपाला नाम की लड़की भी दस साल से छोटी होगी। नाम से उम्र का पता तो चलता ही है, आपका सामाजिक परिवेश, माता-पिता की शैक्षणिक योग्यता का भी अनुमान लगाया जा सकता है।

मेरा एक दोस्त मुझसे हमेशा लड़के और लड़कियों के नए नाम पूछता रहता है। मैं भी उसे गूगलिंग कर नाम झट बता देता हूं। दीपक, अजीत, विशाल जैसे नाम अब नहीं चलते। पता नहीं नाम रखते हुए लोगों को ऐसे नाम क्यों चाहिए होते हैं जिसका मतलब विरलों को ही पता हो। मेरा नाम राजेश रोशन है। अब राजेश नाम बच्चे के माता-पिता के साथ बुआ और मौसी को हलक से नहीं उतरता। राजेश!!! यह भी कोई नाम है राजेशश्श्श्श्। हुंह। ऐसी कुछ प्रतिक्रिया मिलती है।

राज के नाम पर सभी खुश हो जाते हैं। राज, क्या नाम है। राम मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाते हैं। लेकिन उनके नाम को कोई ग्रहण नहीं करना चाहता। कृष्ण। नहीं चलेगा। हां!! कृष्ण के ही कुछ ऐसे नाम बताओ जो लोगों को ना पता हो, जिसे बोलने में जीभ को थोड़ी मेहनत करनी पड़ती हो।

तो अगर किसी टीवी न्यूज चैनल के एंकर की तरह कहूं तो कहा जा सकता है कि..

जाहिर तौर पर नाम बस नाम नहीं है। इसके भी कई मायने होते हैं। नाम का अपना मिजाज होता है। फिलहाल तो हम आपको यही कह सकते हैं कि राम का नाम बुलंद है लेकिन इसे ग्रहण कब कौन करेगा, देखने वाली बात है।

आई कैन ब्रेक इंग्लिश

हम स्कूल में थे। टीचर (मास्टर जी) कहा करते थे कि यू कैन ओल्सो स्पीक इंग्लिश। जस्ट डोंट शाई एंड ट्राई टू स्पीक। ब्रेक द आल रूल आफ ग्रामर। यह सच होते हुए नजर आया आज सुबह। किसी ने अपने घर के सामने एक तख्ती पर लिख रखा था, रेंट्स फार रूम (Rent for Rooms)। लगता है इन्हें भी किसी टीचर ने कुछ कहा होगा।

मान गया लड़कियों को..

हजारीबाग की जिला मजिस्ट्रेट हैं हिमानी पांडे। हिमानी पांडे हिंदुस्तान की संपादक मृणाल पांडे की पुत्री हैं। हिमानी पांडे के बारे में मैं कुछ जांच पड़ताल कर रहा था। तो मुझे एक वेबसाइट दिखी, और उसमें जो देखा वो कुछ नया नहीं था लेकिन फिर भी..।

हिमानी पांडे दिल्ली विश्वविद्यालय से वर्तमान में बीए अंग्रेजी(प्रतिष्ठा) कर रही हैं। अब यह वही हिमानी पांडे हैं या नहीं यह तो मैं नहीं जानता लेकिन.. इससे मेरे निष्कर्ष पर कोई असर नहीं पड़ेगा। हिमानी को 400 में 258 अंक मिले हैं। इससे ज्यादा जिनको भी नंबर आया है सभी लड़कियां हैं। केवल स्टीफेंस कालेज के प्रणव प्रकाश ही एकमात्र छात्र हैं जिन्हें ज्यादा अंक मिला है।

कहीं का रिजल्ट निकले लड़कियां ही आगे होती हैं। मान गया लड़कियों को..।

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