मेरे 29 साल के दोस्त ने फिल्म देखने के बाद कहा, फिल्म अच्छी है लेकिन हमारे उम्र की नहीं है। सोचा मैं भी देख आऊं। कल का दिन मेरा छुट्टी का दिन होता है। टिकट ली और हो आया जाने तू..या जाने ना।

वो क्या कहते हैं कालेज गोअर्स की फिल्म है। सब यंग यंग। लगेगा देखने के बाद कहूं, क्या मस्त फिल्म बनाई है! फिल्म स्टोरी टेलिंग के जरिए आगे बढ़ती रहती है। फिल्म की अभिनेत्री जिनेलिया की पहली हिन्दी फिल्म तुझे मेरी कसम, जो रितेश देशमुख की पहली फिल्म से मिलती जुलती है।

छ: दोस्तों का एक समूह। जिसे हीरो और हीरोइन दोस्त हैं लेकिन उन्हें प्यार नहीं है। सूरज बड़जात्या की ब्लाकब्लस्टर फिल्म मैंने प्यार किया का एक डायलाग मेरे दिमाग में आ जाता है, एक लड़की और एक लड़का कभी केवल दोस्त नहीं रह सकते।

आमिर खान की पहली फिल्म कयामत से कयामत तक का लुक भी देखने को मिलेगा। हीरो ठाकुर है। राजस्थान के रांजौर इलाके का राठौर। जय सिंह राठौर(इमरान खान)। और हीरोइन करोड़पति बाप की अकेली लड़की। इस फिल्म में परिवार किसी भी चीज की मनाही नहीं करता है। किसी भी चीज की नहीं। प्यार करो, नाइट पार्टी करो, डांस करो, मस्ती करो.. सब कुछ मजा मस्ती है। काम करना है तो करो.. नहीं करना है मत करो। हीरोइन का भाई अमित(प्रतीक बब्बर, राज बब्बर और स्मिता पाटिल का छोटा बेटा) कोई काम नहीं करता। कहता है अमीर होने का एक ही फायदा है, कोई काम मत करो।

आज के समाज या शायद आने वाले समाज की हल्की सी झलक है यह फिल्म जाने तू.. या जाने ना।