एमएनसी कंपनियों में काम करने वाले लोग इसे ओपन कम्यूनिकेशन का नाम दे रहें हैं। आफिस में काम करने का ढोंग, एक नया काम बनकर उभर रहा है। हर एक आफिस में आपको कुछ लोग मिलेंगे जो यह काम बखूबी कर रहें हैं। आपको नाम याद आ रहे होंगे। मोनिका, बबिता, गौरव, विकास.. कई सारे नाम आपके दिमा में आ रहे होंगे। आफिस से निकलकर अपने आप को समझदार समझते हैं। गोली दे दिया। ऐसा कुछ भाव लेकर, हंसते-हंसते आफिस से निकलते हैं।

छोटे-छोटे केबिन नुमा आफिस। एक के बगल में दूसरा कंप्यूटर और दूसरे के बगल में तीसरा। कुछ के हिस्से में काम बढ़ गया है। जिनके हिस्से काम बढ़ा है वह सच में काम करते हैं। और कुछ काम का ढोंग करते हैं। उनका काम ही ढोंग करना है। देखकर मालूम होगा कि फलां साहब बहुत काम करते हैं। आठ घंटे की रिपोर्ट मांग ली जाए तो आडवाणी के भाषण की तरह नतीजा निकलेगा सिफर। (आडवाणी जी बोलते ज्यादा हैं, मतलब कम होता है। वाजपेयी जी बोलते कम हैं, मतलब बहुत होते हैं।)

boss and officeआफिस में आने का टाइम और जाने के टाइम दोनो को बीट कर देते हैं। आते लेट से हैं और जाते जल्दी हैं। बास के आने पर सबसे पहले अदब से खड़े होते हैं। टाइम ग्रीट करते हैं। और सामने वाले को कहते हैं, इसको ऐसे कर देना..।

आह.. क्या अंदाज ए बयां है। बास भी कुछ नहीं बोलता है, लेकिन हर बात समझ जाता है। बास बिना कुछ बोले आगे बढ़ जाता है। मैं भी कुछ नहीं बोलूंगा। रेस्ट यू आल नो बेटर..।