क्या बोलूं यार बहुत परेशान हूं। मत पूछ.. क्या-क्या बताऊं। यार ये मेरे साथ ही क्यों होता है। बचपन से लेकर आज तक कभी मेरे साथ अच्छा नहीं हुआ है। :( :(

अब यह हैं सुनने वाले के जवाब-

क्या हुआ बता तो सही!!! वैसे हुआ क्या है!!! कोई बात नहीं सब ठीक हो जाएगा। अरे!! लोगों के साथ इससे भी बुरा हो रहा है।

आपने भी किसी से यह कहा होगा और अगर नहीं कहा होगा तो किसी ने आपसे ही कहा होगा।

हां!! एक बात और परेशानी सबके लिए अलग-अलग है। कोई है बच्चा पतंग ना मिलने पर परेशान हो जाता है तो कोई दसवीं के परीक्षा में तीन बार फेल होने के बाद इसलिए परेशान हो जाता है कि उसे परीक्षा के लिए निर्धारित तीन घंटे का समय पर्याप्त नहीं लगता है। कई लड़कियां इसलिए परेशान हैं कि उन्हें मैथ्स में 93 मार्क्‍स ही आए हैं (ये लड़कियां भी)।

इन सब बातों का पूर्वाग्रह तुलसी दास जी को बहुत पहले हो गया था और उन्होंने लिखा..

तुलसी या संसार में भांति-भांति के लोग॥

एक सर्वे के अनुसार सरकारी नौकरी करने वाले लोगों के ऊपर दबाव कम होता है। लेकिन जो लोग किसी निजी कंपनी में काम करते हैं उनपर काम का दबाव ज्यादा होता।

पत्रकारिता में तो दबाव कुछ ज्यादा ही होता है। अगर आपका बास अच्छा है फिर तो ठीक है नहीं तो पूरा आफिस अपने बास के बारे में जब भी बोलता है..’दिव्य वचन’ ही बोलता है।

क्या आप बता सकते हैं कि आप परेशान होते हैं तो क्या करते हैं? या कोई परेशान है तो उसे क्या कहेंगे?