आपके घर में कोई छोटा बच्चा है। 5 से 15 साल तक काफिर तो आपको हेडिंग समझ में जाएगाऔर अगर ना समझ में आये तो मैं बता देता हुकन्नू, मेरा भतीजा११ साल का है।  सभी बच्चो कि तरह टीवी, विडो गेम उसे बेहद पसंद हैऔरो से अलग उसे सारे स्पोर्ट्स पसंद हैंखेलना नही देखनाक्रिकेट, हॉकी, फूटबाल और WWF। आज मैं उसके साथ बैठा टीवी पर कुछ देख रहा था तभी मैंने चैनल बदलाबोर हो रहा कन्नू कहता है चाचू!!! ३४ लगाओ ना उसपे कार्टून आता है। 

क्या हमलोगो ने कभी बच्चो कि बात मानकर उनके साथ कार्टून देखा हैहंगामा, कार्टून, जेतिक्ष्  और भी कई चैनल हैंसब कुछ है इनमेपॉवर रेंजर्स, पिकाचू, स्पिदेर मन….और ज्यादा मुझे नाम याद नही रहेकार्टून के सभी देशी-विदेशी चरित्र आपको इन चैनल्स में मिल जायेंगेलेकिन वो बात नही हैइन सब का व्यावसायिकरण हो गया हैयाद कीजिये आपने अपने दादा-दादी से कहानिया सुनी होंगी।  जिसके बाद हम बडे खुस हो जाया करते थेऔर अगले दिन फिर दुसरी कहानी सुनाने को जिद करते थे

तेनालीराम किताबो से निकलकर अब टीवी पर गया हैमैं चंदामामा में उसे पढ करता थामेरे लिए तब कार्टून का मतलब केवल He-MAN और Spider Man ही थाकहानिया मैं सुमन सौरभ, चंदामामा या फिर नन्दन में पढा करता था

आज के बच्चे स्य्लुबस कि कहानिया तो पढ़ ले… !!! हमे ही समझना होगा कि हम इन्हें क्या पढ़ाना चाहते हैंक्योंकि बच्चे शास्वत रुप से हमेशा भोले होते हैं